इस दिन को किसी की नजर ना लगे

यह लफड़े वाली नहीं प्यार-मोहबत वाली बात है, इसलिए पढ़ सकते है. कल का दिन खास था, बस इसको किसी की नजर ना लगे.

कल अहमदाबाद में 131 वीं जगतनाथ की रथयात्रा निकली. जय रणछोड़-माखण चोर के खूब नारे लगे. पहली बार यह भय महसूस नहीं हुआ की यात्रा शांति से सम्पन्न हो पायेगी की नहीं. और 25 वर्ष बाद मुसलमानों ने रथ यात्रा का आनन्द लिया. 

इसका महत्त्व समझने के लिए थोड़ा सा पीछे झाँकना होगा. इस शहर के लिए हिन्दू-मुसलिम टंटा एक संस्कृति बन गया था. रोज छिटपुट घटनाएं होना तो आम बात थी. मुगल काल से ही दोनो कौमे टक्कराती रही है. आज़ादी के बाद कई भीषण दंगे इस शहर ने देखे. शकील जैसे मुस्लिम गुंडो को सरकारी छत्रछाया मिली हुई थी.

हर बार रथयात्रा के दौरान भारी तनाव रहता, कई बार बात उठी की रथयात्रा के मार्ग को बदल दिया जाय, मगर यह हिन्दूओं को मंजूर नहीं था.

25 वर्ष पहले भारी दंगे हुए. तब से मुसलमानों ने रथ यात्रा के दौरान “जनता कर्फ्यू” को अपनाया. इस दिन घर वाले युवक मुसलमानों को अपने घर वाले बाहर नहीं निकलने देते थे.

मोदी शासन में आए ही थे, तब अहमदाबाद में अंतिम बार दंगे हुए थे, तब से उन्होने गुण्डागर्दी को शक्ति से कुचला और फिर रोज रोज की सर-फुट्टोवल भी खत्म हुई. अब ऐसा माहौल बन गया है की मुसलमानों न केवल पिछले चनावों में उन्हे वोट दिया बल्कि इसबार स्वघोषित कर्फ्यू भी हटा लिया और रथयात्रा में निर्भीक हिस्सा भी लिया. “जय रणछोड़”.

यह साबित करता है की आपसी सौहार्द के लिए तुष्टीकरण की, देशद्रोहियों के आगे घूटने टेकने की नहीं बल्कि सुशासन की जरूरत है.

अब जलने वाले चाहे जले या जिनकी रोजी रोटी मुसलमानों के दीन हिन बने रहने से चलती है वे “नजर लगाये” , फिलहाल हमारे शहर में सबसे शांति के दिन गुजर रहे है और इससे हिन्दू-मुस्लिम सब खुश है.

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10 Responses to “इस दिन को किसी की नजर ना लगे”

  1. कुश says:

    “जय रणछोड़”
    अजी यही तो खास बात है मोदी जी की.. मैं तो इंतेज़ार में हू की वो प्रधानमंत्री कब बने.. क्योंकि जो दृश्य आपने अहमदाबाद में देखा है.. मैं वो पूरे भारत में देखना चाहता हू

  2. सुखद और अनुकरणीय माहौल को “जय रणछोड़ ” जी , गाँधी की सुन ली गई क्या ? “ईश्वर अल्ला तेरो नाम सबको सन्मत दे भगवान् ”
    नेताओ के पहुच से बाहर का लोग शरीफ होते है .

  3. Anunad Singh says:

    तुष्टीकरण ने देश का बहुत नुकसान किया है। भारत को सही मायने में सेक्युलर करने से ही इसका भला होगा। अभी तक तो भारतीय सेक्युलर केवल दोमुंही बातें ही करते रहे हैं जिससे यह देश जेहादियों का ऐशगाह बन गया है।

  4. सच है सुशासन सब मर्ज की दवा है।

  5. बहुत अच्छा लगा पढ़कर..ये माहौल ऐसे ही बना रहे, यही कामना है.

  6. बरसों से देख रहे हैं, सभी दलों में अल्पसंख्यकों के वोट की खातिर प्रकोष्ठ खोल दिये जाते हैं। जो लोग सारी जनता के नेता बनने की क्षमता रखते हैं वे केवल अपने अल्पसंख्यकों के नेता बन कर रह जाते हैं। सभी दलों ने वोट के खातिर अल्पसंख्यकों का शोषण किया है उन्हें मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता है। उन्हें एक तरफ धकेलने के कारण ही तो आतंकॉवाद को पनपने का अवसर मिलता है। यदि मोदी का यही चरित्र और खसूसियत है तो फिर उन के पूरे दल में यही क्यों नहीं हो रहा है? भाजपा शासित सभी राज्यों में यह क्यों नही हो पा रहा है?
    मेरे अपने शहर में दंगे की एक संस्कृति हुआ करती थी। हमने पहले-पहल इस संस्कृति को तोड़ा। ताकत के बल पर। ऐसे नौजवानों का संगठन बनाया जो लड़ने लड़ाने पर उतारू हो जाएँ। उन के बीच संस्कृति विकसित की साथ जीने की। मेरे घर जब रामायण पाठ होता तो नेवता देने शब्बीर भाई जाया करते और पूरे रामायण पाठ के दौरान वहीं बने रहते। उन के घर कोई कार्यक्रम होता तो मेरा भाई और दूसरे लड़के जाते। हमारे घरों का हिन्दू साहित्य मुस्लिम घरों में पहुँचने लगा और हमारे लोगों ने इस्लाम के बारे में जानना प्रारंभ किया।
    आज स्थिति यह है कि ताजिए के जलूसों की व्यवस्था भी यही संगठन देखता है तो दशहरा भी यही संगठन आयोजित करता है। देश में कितने ही साम्प्रदायिक जलजले आए लेकिन मेरा शहर अभी तक उन से महफूज है। अल्पसंख्यकों की अल्पसंख्यकता समाप्त करने की जरूरत है। हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई के बीच की दीवार ढहाने की जरूरत है पहले सब को हिन्दुस्तानी बनाने की जरूरत है। उसके लिए सबसे जरूरी चीज है बहुसंख्यकों को पहले हिन्दुस्तानी बनना होगा, चाहे वे हिन्दू हों, या मुसलमान, या फिर ईसाई, या सिख। देश में साम्प्रदायिक सोहार्द्र का सत्यानाश इस स्वार्थ और वोटों की राजनीति ने किया है। दूसरा सबसे बड़ा नुकसान किया है अशिक्षा ने, जिस के कारण अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना फैला कर मजहबी राजनीति के बीजों को बोने का अवसर मिलता है। अगर अल्पसंख्यकों को शासन या ताकत की सुरक्षा का विश्वास मिले तो बहुत सी समस्याएँ। स्वतः ही हल होने लगें। लेकिन फिर अक्षम, षड़यंत्रकारी, लुटेरे, अपराधी सत्ता में कैसे पहुँच पाएँगे?

  7. चलिये, अमन चैन बना रहे. मेरी शुभकामनाऐं.

  8. SHUAIB says:

    ख़ुदा करे ये माहोल ऐसा ही बने रहे

  9. सही कहा आपने। हमारी भी यही दुआ है कि इस दिन को किसी की नजर न लगे।

  10. नज़र बिलकुल नही लगेगी और उम्मीद करता हूँ कि पूरे भारत में ऐसा ही होगा।

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