कार्टून : गाँधी अगर आधुनिक हो तो…

(सोनिया माइनो) गाँधी के बन्दर

bandar

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मैने भावनाएं व्यक्त करने के लिए दो कार्टून का केवल डिजीटली सम्पादन किया है. मूल कार्टूनिस्टों का आभार.

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13 Responses to “कार्टून : गाँधी अगर आधुनिक हो तो…”

  1. आधुनिकता के चलते सभी का अवमूल्यन होना है – चाहे बन्दर हो या गांधी!

  2. ज्ञान जी के कथ्य को डिजीटली संपादित कर प्रस्तुत कर रहा हूं
    “आधुनिकता के चलते सभी बन्दरों का अवमूल्यन यही होना है ….”
    क्षमा/आभार/धन्यवाद…कुछ ही मान लें 🙂

  3. अच्छा डिजीटल व्यंग्य 😉 😉 😉

  4. Anand Sharma says:

    पता नहीं क्यूँ बन्दर को भारत की राजनितिक गंदगी में घसीट कर उसका चरित्र हनन किया जा रहा है |
    लगता है गाँधी में इतना साहस नहीं था कि वो किसी गाँधी टोपी पहने हुए अनुयायी को अपनी उक्तियाँ कहते हुए दिखलाते |
    क्या आप लोगों को गाँधी का कोई अनुयायी दिखा है जिसने सार्वजनिक तौर पर गाँधी की तथाकथित उक्तियों कि घोषणा की हो और उनका पालन किया हो ?
    यह भी सम्भव है कि उन्हें बन्दर अपने अनुयायियों से अधिक सज्जन जान पड़े |
    जितना ज्ञात है उसके अनुसार गाँधी को बकरी प्रिय थी – न कि बन्दर |
    उनके नाम पर धंधा करने वाले बकरियों की तरह हर समय देश की सम्पत्ति को चर रहे हैं |

  5. “बन्दर” तो शुरु से ही ईमानदार रहा है… लेकिन साला जब से यह “आदमी” बना है… तभी से… 🙂 🙂

  6. यह बन्दरनुमा तोता है तो अच्छा, लेकिन इसे पिन्जरे में बन्द करके इसके पंख काट दिये गये है मेरे भाई…

  7. बेचारे बंदरों ka अपमान कर दिया आपने भाई साहब…

    वैसे कांग्रेस में पुराणी प्रथा है..मदारी केवल एक होता है…

  8. ePandit says:

    गाँधी जी के तीन बन्दर नहीं एक बन्दर ही तीनों का रोल कर रहा है।

  9. बढ़िया संपादन किया है जी | सच भी यही है |

  10. dinesh verma says:

    बहुत शानदार है

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