कुरान में तो बहुत कुछ नहीं लिखा गया है…तो?

कुरान में लोकतंत्र के बारे मे नही लिखा गया है, यह कहना है पाकिस्तान के स्वात इलाके के प्रमुख धार्मिक नेता सुफी मुहम्मद का (कड़ी). सही है कुरान में मानव-अधिकार, स्वतंत्रता, नारी स्वतंत्रता पर भी नहीं लिखा गया होगा….तो क्या कुरान में ए.के.47/56. रॉकेट-लॉंचर, टेंक, आर.डी.एक्स के उपयोग के बारे में लिखा गया है? आधुनिक मशीनों से बने कपड़े, आधुनिक मकान, इंटरनेट, आधुनिक संचार के साधन, परिवहन के साधन व सड़कों के उपयोग के बारे में लिखा गया है? फिर इनका उपयोग क्यों करते है? ये लोग किन्हें मूर्ख बना रहें हैं?

वास्तव में ये लोग एक बर्बर प्रजाति है जो आधुनिक समाज के शत्रु है. ये हर उस संस्था के शत्रु हैं जो लोकतंत्र व स्वतंत्रता में विश्वास करती है. अतः इनका सफाया केवल अमेरिका या यूरोप की जिम्मेदारी नहीं है, यह जिम्मेदारी हर उस सभ्य समाज की है जो लोकतंत्र, स्वतंत्रता व मानव-अधिकार में विश्वास करता है. अतः भारतीय सेना को भी अभियान में हिस्सा लेकर इन्हे इनकी भूमि पर ही दफना देना चाहिए. या फिर हमें उस दिन की प्रतिक्षा करनी चाहिए जब हम या तो जिहाद के शिकार होंगे या कायरों की तरह जजिया भरेंगे.

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

27 Responses to “कुरान में तो बहुत कुछ नहीं लिखा गया है…तो?”

  1. बहुत सही !  कुरान  वस्तुत:  मोहम्मद का  राजनीतिक-सामरिक-मैनिफेस्टो  के रूप में बनाया गया था ताकि लोगोंको मूर्ख बनाकर युद्ध में जीत हासिल की जा सके।  दुर्भाग्य है कि  लोग इसकी असलियत नहीं समझते।

  2. बात तो बिलकुल सही है आपकी. पता नहीं ये सब कहाँ ले जायेगा:
    http://news.rediff.com/interview/2009/apr/20/taliban-vows-to-enforce-shariah-across-pakistan.htm

  3. अपने लिए जो सुलभ, वैसी ही बातें कहने वाले लोग हैं.
    जहाँ तक इन्हें ख़त्म करने की बात है तो इन्हें ख़त्म करने से पहले उन अंधों को भोगने देना चाहिए जिन्होंने इन्हें खड़ा किया है. आज विश्व समुदाय के सामने रोने वाले ज़रदारी अपने कर्मों को याद करें. कल टीवी पर उन्हें यह कहते हुए सुना कि तालिबान से खतरा केवल उनके बॉर्डर तक सीमित नहीं है. लगा जैसे धमकी दे रहे हैं. बनाने में बहुत मज़ा आता है. अब जब इन्हें ही खाने चला तो रो रहे हैं. बचाओ…बचाओ का ‘नारा’ लगा रहे हैं.
    जितने दोषी तालिबानी हैं, उनसे कहीं भी कम दोषी ये चांडाल नहीं जो लोकतंत्र का दिखावा करते हैं.

  4. SHUAIB says:

    एक बात बोलूं
    अगर बुरा लगे या घटिया लगे तो मेरी टिप्पणी मिटादें

    आज अख़बारों मे मैं ने भी ये ख़बर पढा,

    पुरा ज़मानों मे लोगों को कुछ काम-धाम नहीं था।

    ये क़ुरान, बाइबल, गीता…..
    आज का इंसान व्यस्त है। पिछले ज़माने के लोगों मे टाइम ही टाइम था। और मुझे पक्का यकीन है कि ये सब धार्मिक पुस्तकें वही लोग बनाए हैं जो खाली खाली बैठे रहते थे।

    आज भी देखलो – पैदाइशी इंसान इन धार्मिक पुस्तकों पर कितना यकीन रखता है। इनसे अच्छे अंपढ लोग हैं।

  5.  अतः भारतीय सेना को भी अभियान में हिस्सा लेकर इन्हे इनकी भूमि पर ही दफना देना चाहिए. या फिर हमें उस दिन की प्रतिक्षा करनी चाहिए जब हम या तो जिहाद के शिकार होंगे या कायरों की तरह जजिया भरेंगे.

    आपकी बात बिल्कुल सही है. इसका किसी देश, जाति या धर्म से कोई लेना देना नही है. यह हर शांति से जीने के इच्छुक और लोकतंत्र मे विश्वास रखने वाले इन्सान की जरुरत है. बहुत धन्यवाद.

    रामराम.

  6.  दो बातें हो सकती हैं. या तो ये हम सब को नेस्त नाबूद कर देंगे या फिर खुद नेस्त नाबूद हो जाएँगे. इसके अलावा कोई तीसरा विकल्प नहीं दिख रहा. ये इंसानियत के दुश्मन हैं, इसलिए दुनिया को बचाना है तो इन्हें तो जहन्नुम में जितनी जल्द हो सके भिजवाना पड़ेगा.

  7. यह बड़े आश्चर्य की बात है कि इतने बड़े भू भाग पर इस तरह के लोगों की चल कैसे रही है।

  8. कुश says:

    ये लोग कुरान पढने के लिए समय कहाँ से निकालते होंगे?? क्या वाकई पढ़ते भी होंगे ?? ऑर अगर हाँ तो क्या समझते भी होंगे ?? ऑर अगर समझते भी होंगे तो क्या ये समझते है?? लगता है कुछगड़बड़ है

  9. LOVELY says:

    विवादास्पद बात है, पर सच है “धर्म अफीम है “

  10. vivek says:

    @कुश
    अधिकतर हाफिज़ होते हैं यानी उन्हें बचपन में ही पूरी कुरान कंठस्थ करा दी जाती है. समझने का दावा तो हम आप भी नहीं कर सकते, करें भी तो कोई भी हाफिज़ या मोमिन हमारी समझ पर सवाल उठा सकता है. उनकी समझ को हम कैसे गलत कह सकते हैं, उन्होंने जो समझा वह सही ही होगा, आखिर उन्होंने सारी ज़िन्दगी ही इस्लामिक माहौल में और मौलानाओं के बीच गुजारी है. कुछ खुद मौलवी / मौलाना(इस्लामिक विद्वान)  हैं.

  11. DHIRU SINGH says:

    कुरान को अगर पढ़े विश्लेष्ण करे तो आप को लगेगा जो यह कठमुल्ले उसकी व्याख्या कर रहे है वैसा तो कुछ भी नहीं है . उसमे महिलाओ के संरक्षण के लिए सिर्फ चार शादियों का कोटा है . लेकिन हिन्दुओं मे ऐसी कोई पाबंदी नहीं है . यह तो हिन्दू पर्सनल ला सरकार का बनाया है

  12. Lavanya says:

    तालिबानीयोँ से ऐसे सवाल करेगा कौन ? हम और आप भले ही पूछ लेँ – उन्हेँ जवाब देना ही नहीँ – सिर्फ अपनी मर्जी से सारी दुनिया पे हुकूमत करनी है – एकतरफी बातचीत है ये सारी

  13. HEY PRABHU YEH TERA PATH says:

    p {margin:0;line-height: 1.5;unicode-bidi: embed;} body { line-height: 1.5;unicode-bidi: embed;}
    सन्जयजी
    आपने बहुत ही आवश्यक विषय पर आलेख दिया है। आजके समय मे इसकि आवश्यकता थी।इस्लामाबाद से महज १६० किमी दुर स्थित स्वात घाटी( जो खुबसुरत टुरिस्ट डेस्टीनेशन के लिऐ जानी जाती है।) शरिया कानुन पाकिस्थान कि सरकार ने तालिबानियो से एक समझोते के तोर पर लागु किया है। यह धटना हमारे लिऐ चिन्ताकरक है ही मुस्लिम समाज कि  ओरतो, बच्चो के लिऐ नारकिय जिवन बन जाऐगा।

  14. कपिल says:

    लवलीजी की बात से 100 फीसदी सहमत।

  15. amit says:

    बात तो सही है, कुरान में बहुत सी चीज़ों के बारे में नहीं लिखा है – तो मियां साहब के लिए उन सब चीज़ों का इस्तेमाल हराम होना चाहिए! 🙂

  16. amit says:

    बाकी इनको खत्म करने की बात से मैं सहमत नहीं हूँ। किसी को महज़ इसलिए नहीं खत्म कर देना चाहिए कि वह आपके विचारों से सहमत नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो आपमें और उन आतंकवादियों में क्या फर्क रह जाएगा? आपमें और उन आतंकवादियों में ज़मीन आसमान का फर्क है और यह फर्क रहना चाहिए। 🙂 आक्रांता को खत्म करो, स्वयं आक्रांता न बनो। 🙂

    वैसे इन सूफ़ी साहब का इतिहास कमज़ोर है, लोकतंत्र पश्चिम में नहीं जन्मा था। वहाँ तो लोग नंग धड़ंग घूमते थे जब यहाँ भारत में गणराज्य होते थे! सबसे पुराने गणतंत्रों में प्राचीन भारत के जनपदों से पुराना कोई उदाहरण मैं नहीं जानता, गूगल खोज पर भी नहीं मिला कोई वर्णन। 🙂

  17. सही है…अपने हिसाब की बात सुविधानुसर निकाल ली उन्होंने. नालायकों से और क्या उम्मीद लगाये हो?

  18. anil kant says:

    आपने बिल्कुल सही लिखा है

  19. @अमित
    सुफि साहब का ज्ञान कमजोर नहीं है. उनका इतिहास तभी से शुरू होता है जब से मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारत पर अधिकार जमाया था. जिस भूमि को इन्होनें नर्क बना दिया है वह कभी सुवास्तु थी यह उन्हे नहीं मालूम.

  20. इस्लामी सम्प्रदाय की सबसे बड़ी खामी यह है कि वह आजसे तेरह सौ साल पहले मुहम्मद साहब द्वारा जो कुछ भी कह दिया गया उससे एक कदम भी आगे चलने को तैयार नहीं है। हमारी सभ्यता वैज्ञानिक प्रगति के साथ-साथ चाहे जितना आगे बढ़ती जाय लेकिन इस्लामी मुल्ला कुरान में लिखी किसी बात को आज के परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित करने के बजाय उस समय की कबीलाई बर्बरता के नजरिए से ही देखने के हिमायती हैं।

    यह पश्चगामी सम्प्रदाय जिस राजनैतिक और सामाजिक वातावरण के बीच खड़ा हुआ था, उसी वातावरण तक इस दुनिया को वापस धकेल कर ले जाने को उद्यत इन तालिबानियों के विरोध में किसी मुस्लिम का मुखर स्वर मैने नहीं देखा सुना है। इससे यह विश्वास दृढ़ होता है कि मुस्लिम धर्म हिंसा का हिमायती है और उदार से उदार मुस्लिम भी इससे अछूता नहीं है।

  21. भाईसाहब, मात्र मुस्लिम कह कर इस सोच को व्याख्यायित नहीं करा जा सकता है क्योंकि इनमें स्वयं बहत्तर अलग-अलग फिरके हैं और आपस में अपनी आदिम सोच के चलते हर फैसला तलवार की ज़ोर पर ही करना जानते हैं।
    @शुएब
    भाई,कितने लोग इस बात को मानते हैं जो लिखा है (अबू दाउद) हज़रत मुहम्मद स.अ.व. ने फ़रमाया जो मुसलमान किसी ग़ैर मुस्लिम पर जुल्म करेगा या उसका हक़ मारेगा या उससे कोई चीज़ जबरदस्ती ले लेगा तो मैं खुदा की अदालत में मुसलमान के खि़लाफ़ उस ग़ैर मुस्लिम का वकील बन कर खड़ा रहूंगा।
    (बुखा़री,मुस्लिम,अबू हुरैरा) हज़रत हज़रत मुहम्मद स.अ.व. ने तीन बार फ़रमाया खुदा की कसम वह ईमान नहीं रखता जिसका पड़ोसी(मुस्लिम या ग़ैर मुस्लिम) तकलीफ़ों से महफ़ूज न हो।
    अब आप खुद ही सोच लीजिये कि आज की दुनिया में कुल कितने मुसलमान होंगे?
    बहुत हद तक सिद्धार्थ शंकर जी की बात से सहमत हूं लेकिन जैसे चोटी रखने और तिलक लगा लेने से कोई ब्राह्मण नहीं बन जाता वैसे ही कोई दाढ़ी रख लेने से मुसलमान नहीं बन जाता, धर्म आदमी को इंसान बनाता है ये टाइम पास करने के लिये लिखे उपन्यास नहीं हैं। सबसे बड़ी बात कि आप आज के जिस परिप्रेक्ष्य की बात करते हैं यानि कि लोकतंत्र के धर्माधार की वह है हमारा लिखित संविधान लेकिन वह भी इन धर्म पुस्तकों से परे नहीं ले जाता हमें और साथ ही हमें एक सहज सामाजिक व्यवस्था प्रदान करता है।
    तालिबान मात्र बर्बर आदिम किस्म की सोच है उन्हें समाप्त करना ही सही इस्लाम का संदेश है इस बात पर ध्यान दीजिये आप सब।

  22. Adnan says:

    Sanjay Ji

    You have every right to express your opinion. Yes, what Taliban are doing is wrong. But the problem is that media amplifies things and you also don’t look at things in perspective.

    In the last couple of weeks, dozens of attacks were conducted by Naxalites, ULFA led bomb strikes, Nagas and Bodos are as much engaged in such incidents, but why they are not called terrorists? They are termed simply rebels or outlaws. They are not even killed militants.

    Just a couple of days back 19 had died in a single day on the first phase of poll. Believe me, if any of these attacks in the last couple of months had one Muslim involved, for days you would have seen reports about ‘modules’. In this case you don’t even get to see reports on front page of papers for more than a day.

    You are quite techno savvy and write well but you seem to be more Hindu than Indian. I love my country and love my Hindu brethren. When I write names of Hindu gods , I write Lord Rama or Sri Krishna Ji.

    Hold your beliefs close to yourself and write, but at least, let the comments be civilised. Names of holy figures of Islam should be written respectfully. Of course, you love to change the spelling of Ahmedabad and call it Karnavati, but I hope apart from this ‘nationalism’, you do have the basic humanism.

    In fact, such comments lower the bar. Even your beloved organisations, I have heard, call for ‘sanyamit bhasha’ and ‘maryada’. Hopefully you will reciprocate my gesture.

    Meanwhile, Gita doesn’t tell what Varun Gandhi said. And Vedas don’t say what your close organisations preach and do. Any way, best of luck. And happy blogging. I would just want to know if you have any Muslim friend?

  23. आप भी वही गलती कर बैठे जो कई अन्य लोगों ने की है – तालिबानों को मुसलमान समझ लेने की। ये उस अर्थ में मुसलमान कतई नहीं है जैसे कुरान में लिखा है।

    ये एक राजनीतिक शक्ति है जिसका उद्भव अमरीका और रूस के बीच के शीत युद्ध का परिणाम था। अमरीका को अफगानिस्तान से रूस को खदेड़ने के लिए कैनन-फोडर की जरूरत थी, और उसने अपने मित्र पाकिस्तान के आईएसआई की मदद से इस राक्षस को खड़ा किया, जो अब भस्मासुर के समान उसके दोनों निर्माता, यानी अमरीका और पाकिस्तान, पर ही प्रहार कर रहा है।

    ठीक से देखा जाए, तो इन तालिबानों में और पंजाब में इंदिरा गांधी द्वारा राजनीतिक कारणों के लिए खड़ा किए गए बिदरावाले जैसे लोगों में कोई अंतर नहीं है। अब बिंदरावाले को कोई गुरुगोबिंद सिंह या गुरु नानक से घालमेल करके पेश करे, तो यह कितनी बड़ी गलती होगी।

    इनके प्रति सही दृष्टिकोण यह होगा कि इन्हें मानवजाति के कोड़ के रूप में देखना। इनका धर्म से कोई संबंध नहीं है। धर्म का ये केवल गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। यह फर्क समझना जरूरी है, अन्यथा इस राक्षस का अंत नहीं हो सकेगा।

    वैसे 21वीं सदी में धर्म प्रासंगिक रहा भी नहीं है। उसके फटे ढोल को निरंतर पीटते जाना निरर्थक है। उसकी जगह मानव जाति के असली दुश्मनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए – गरीबी, अशिक्षा, भूख, बेरोजगारी, बीमारी, आदि, आदि, फिहरिस्त लंबी है।

  24. narendra says:

    भगवान मुघे सपने मे कश्मिर से ले कर पुरे भारत के शभि मामलो का उपाइ बताए हे.
    १.१९४७ के बात्वारे पर विचार करते हुए कश्मिर का मुशलमान बहुल इलाके को पाक को देते हुए १००% मुशल्मानो को भि पाक को दे दो. ओर जो भि हिन्दु पाक मे हो उन्हे वापस ले लो.
    इससे आतकवाद,शभि मन्देरो के मुदे, सामप्र्धिक दगे,७००वशो का पाप भि शाफ हो जाय गा.

  25. neeraj says:

    very right

  26. raj says:

    जो आपने लिखा है शायद वो सही हो किन्तु आप इतने समझदार है की आप भी यह जानते होंगे कोई धर्म हिंसा नहीं सिखाता
    यदि में गीता की बात करू तो उसमे भी लिखा है की धर्म की रक्षा के लिए भाई को भी मरना गलत नहीं है क्या आप यह कह सकते है की गीता अहिंसा का पाठ पद्धति है

  27. Manoj Kumar says:

    हमें लगता है की कुरान सिर्फ ईस लिए लिखा गया है की पूरी दुनिया में सिर्फ मुस्लिमों का राज हो.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *