कौन कहता है ठाकरे में दम नहीं

balthakreमैं ठाकरे परिवार की सेना के क्रिया कलापों का समर्थक कतई नहीं हूँ. ब्लॉग पर सदा आलोचना ही की है. मगर जो सत्य है वह तो है ही. ठाकरे की हवा निकल जाने की बाते जिस तरह मीडिया व अन्य माध्यमों ने उछाली है वह सरासर झूठ है. युवराज के लिए ‘भाँड-राग’ अलापना हो तो अलग बात है.

अगर ठाकरे चुक गए है, प्रभाव हिन हो गए तब युवराज की मुम्बई यात्रा के दौरान जबरदस्त किलेबन्दी की जरूरत क्यों पड़ी. पूरी राज्य सरकार काम पर लग गई, तमाम सुरक्षाकर्मी जहाँ मुम्बई को घेरे रहे, शिवसैनिकों को उठा उठा कर जेलों में ठूँस दिया गया. तुर्रा यह की शिवसेना कुछ न कर सकी.

शाहरूख खान मर्द आदमी है. ठाकरे को खरी खरी सुना दी. ठाकरे चुक गए है. मुम्बई हमले को भूल चुका यह पाकप्रेमी मर्द शहर में आते ही ठाकरे से माफी माँग लेता है. अगर शिवसेना प्रभावहिन है तो खान मर्द बने रहते.

देश का कृषिमंत्री, महाराष्ट्र में एक शासक दल का नेता, ठाकरे के दरबार में हाजिर हो कर अर्ज करता है कि शिवसेना ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को खेलने दे. फिर हम कैसे मान लें कि ठाकरे का प्रभाव खत्म हो गया है?

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17 Responses to “कौन कहता है ठाकरे में दम नहीं”

  1. Mahfooz says:

    बात तो आपने पते की कही है…..

    पुर्णतः सहमत…..

  2. पर मेरी जानकारी में तो शाहरूख ने मॉफी नहीं मांगी।

  3. kajal kumar says:

    करिश्मा जाते जाते जाता है

  4. रमेश says:

    शाहरुख़ खान माफ़ी मांगे भी किस बात की ?

  5. संजय भाई खूब मेहनत करके लम्बी चौड़ी प्रतिक्रिया लिखी मगर वो बिना नाम डाले सबमीट करने से गायब हो गई।खैर इस बार छोटी सी,सहमत हैं आपसे पूरी तरह्।

  6. P.C.Godiyal says:

    क्या ठाकरे, क्या कौंग्रेस क्या ये इनके लीपापोती करने वाले, सभी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे है !

  7. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार शरद पवार ने बाल ठाकरे से मंहगाई के मुद्दे बातचीत करने के लिए मुलाकात की है.
    🙄

  8. हाथी बैठ भी जाये, तब भी गधे से ऊँचा ही रहता है… 🙂 और गधे ने अपना कर्तव्य निभाया है “सजदा” करके…

  9. बात तो सही है….मगर मीडिया को भी तो अपनी वफादारी निभानी है.. 😛

  10. जनाब,
    बड़ी ही खूबसूरत बाते लिखी आपने और बिला-नाजोनखरो के पहले ही कबूल लिया की आप कतई शिवसेना के ख्यालो से इतेफाक नहीं रखते जो की आपकी साफगोई मुझे बड़ी पसंद आई /
    परन्तु मै समझता हूँ की राहुल की तरफदारी और ठाकरे की खिलाफत दोनों ही किस्म के रवैये से हांसिल कुछ नहीं होना दोनों ही मौसेरे भाई है लिहाजा मीडिया यूं नहीं की इनकी रवायत नहीं समझता , बल्कि मै समझता हूँ की मीडिया पूरे होशो-हवाश में राहुल जय हो गान कर रहा है क्यों की राहुल कमसकम देश जोड़ने की भले ही बाद में गफलत साबित हो बाते तोकर रहा है जब की शिवसेना चालिस साल पुरानी विधवा के रोने धोने के पाखंड से ज्यादा क्यों कर है ये आप बयान करे !
    पुनश्च, बेहतर लेख के लिए आपको मुबारकबाद देता हूँ /
    थैंक्स/

  11. जब लेंडू छाप सेकुलर अपनी जान छिपाते फिरते हैं तो ठाकरे के गुंडे ही काम आते हैं। कई उत्तर भारतीयों को ठाकरे ने नेता बनाया है और हाल में भी वे प्रमुख पदों पर आसीन हैं। जिन्होंने पार्टियां बदली तो वे साधु हो गए? क्या लोगों को यह पता नहीं कि उत्तर भारत से कितने खूंखार गैंगस्टर मुंबई में आए?

    दरअसल, उत्तर भारतीयों के दबदबे से भरा मीडिया निजी खुन्नस के चलते ठाकरे को गरिया रहा था। मीडिया के लिए दूसरा फ़ायदा राहुल की प्रशंसा मे था।

    लालू का भूराबाल राजनीति, दलित-रणबीर सेना की भयावह हिंसा पर होती जातिवादी राजनीति, मायावती की ब्राह्मण साफ़- बनिया माफ़ और जूता मारो वाली घृणास्पद राजनीति, असम में सैकड़ों हिन्दीभाषियों की हत्या पर होने वाली राजनीति, कश्मीर का अलगाववाद और पाक को खुला समर्थन देने वाली राजनीति क्या ठाकरे से कमतर है? बताएं ज़रा कि मुंबई मे शिवसेना वालों ने कितनी जाने हिन्दीभाषियों की ले लीं?

    अब लालू-माया-गिलानी सरीखे लोग हमारी राजनीति की मुख्यधारा में हीरो बने बैठे हैं और ठाकरे विलेन बना दिए गए क्यों?

  12. क्षमा करियेगा बेंगाणी जी.. आपके अग्निवर्षी तेवरों का कायल हूँ, लेकिन ठाकरे साहब का यह दम निरीह उत्तर भारतीय मजदूरों पर जब निकलता है, तो बड़ा दुःख होता है..

    अपार जनसमर्थन रखने वाले राजनेता भी अगर इस किस्म की संकीर्ण मानसिकता का परिचय देने लगेंगे, तो देश का बंटाधार होते देर नहीं लगेगी..

    कितने दिन हो गये ठाकरे साहब को राष्ट्रहित की कोई बात किये.. उनकी सारी बात मराठा मानुस तक क्यों सिमट कर रह जाती है?

    पाकिस्तान का विरोध करना अब शिवसेना की विचारधारा से नहीं, बल्कि जिद से ज्यादा संबन्धित लगता है.. दिक्कत यह है कि एक बार उग्र हिन्दुत्व और पाकिस्तान विरोध की बात करने के बाद अब यह शेर की सवारी बन गई है.. उनसे उतरते नहीं बनता अब..

    शाहरुख खान की क्या बात.. वह मुल्क़ नहीं चलाता, उसे पैसा कमाना है, चाहे ठाकरे को गरिया कर कमाये, चाहे उनके तलवे चाट कर.. यह ठाकरे को समझना चाहिये कि शाहरुख, सचिन की आलोचना करके और बिहारी मजदूरों को मारपीट कर जनता की क्षणिक उत्तेजना तो कमाई जा सकती है, लेकिन शेष भारत की संवेदना नहीं..

  13. संजयजी,
    शेर बूढा हो तो भी शेर ही कहलाएगा ऒर मरने पर भी शेर ही कहलाएगा.
    ऒर तो ऒर, शेर दहाडेगा भी शेर-सा ही.
    जब तक शेर जिन्दा है बिल्ली के बच्चे अपनी माँ की गोद में ही रहें तो बेहतर है…

  14. Sahi kaha aapne….

    Geedad to geedad hain hi…par sher raaj yadi sahi raaste hote to koi shanshay nahi ki bhaarat kee kam se kam 60% aabaadi unke peechhe hath baandhe khadi hoti…bas yahi ek durbhagy ki baat hai…

  15. Rakesh Singh says:

    संजय जी आपसे सहमत हूँ |

    पर एक बात और कहना चाहूँगा की शेर (ठाकरे) जब अपनों और दुश्मनों में भेद बंद कर अपने (उत्तर भारतीय) को ही काटने दौड़ता रहा है तो मजबूरन ये कहना पद रहा है की इस शेर से छुटकारा पाना चाहिए | पता नहीं ये ठाकरे (चाचा – भतीजा) कब महारास्त्र को पंजाब जैसे अलगाववाद के रास्ते पे ला खडा कर दे !!!!!

  16. ज्ञानदत्त पाण्डेय says:

    शाहरूख खान मर्द आदमी है. ठाकरे को खरी खरी सुना दी. ठाकरे चुक गए है. मुम्बई हमले को भूल चुका यह पाकप्रेमी मर्द शहर में आते ही ठाकरे से माफी माँग लेता है. अगर शिवसेना प्रभावहिन है तो खान मर्द बने रहते
    ————
    नचनिया-बजनिया मर्द?!

  17. SHUAIB says:

    अच्छा खेल खेला है शाहरुख़, बालठाकरे और मीडिया वालों ने। जनता को बेव्वकूफ़ बनाने पर इन सभी को मुबारकबाद।

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