ताकि मुसलमान नाराज न हो?

कभी कभी कहने वाला क्या खूब कह जाता है कि बरबस वाह वाह कह उठने को मन करता है. अब यह पढिये…यह बेव दुनिया की खबरों में छपा है… 

माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य एमके पंधे ने मुलायम सिंह यादव से कहा कि परमाणु करार का समर्थन करने का फैसला करने के पहले दोबारा विचार कर लें क्योंकि मुस्लिमों को उनकी पार्टी को वोट बैंक माना जाता है, जो करार के खिलाफ हैं।

  • माने देश हित के कार्य यह देख कर किये जायेंगे की मुसलमान नाराज न हो?
  • माने मुसलमान पंधेजी को कहने गये थे की वे करार के विरूद्ध है.
  • माने जो हिन्दु करार के विरूद्ध है उनका कोई महत्त्व नहीं है, देखा यह जायेगा की मुसलमान क्या चाहते है.
  • माने अब वामपंथी इसी तर्ज पर यह भी कह सकते है की रामसेतु न तोड़ा जाय क्योंकि हिन्दू नाराज हो कर वोट नहीं देंगे.
  • माने महान धर्मनिरपेक्ष ताकते देश की चिंता छोड़ कर धर्म विशेष के लोग नाराज न हो जाये इसकी परवाह करते है, वोट और वोट बैंक की राजनीति करते है.
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17 Responses to “ताकि मुसलमान नाराज न हो?”

  1. अरूण says:

    :० ये भी महानता का ही हिस्सा है, लगता है पोलित ब्यूरो भी मोह्ल्ले का ही हिस्सा है 🙂

  2. कुश says:

    राजनीति खोखली होती जा रही है..

  3. वामपंथियों को देशहित से कोई मतलब नहीं है। हर फैसले को मजहब के चश्‍मे से देखना खतरनाक है। एमके पंधे साहब, मुलायम सिंह परमाणु करार का समर्थन करने के फैसले से पहले दोबारा विचार करें न करें, कम से कम आप तो कुछ बोलने से पहले जरूर विचार करें। हद हो गई। मुसलमानों को सिर्फ वोटर के रूप में नहीं एक नागरिक के तौर पर भी देखने की कोशिश कब करेगी माकपा।

  4. bhuvnesh says:

    क्‍या कहें…..

  5. कुछ भी करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि कोई नाराज ना हो जाए। इसीलिए तो कुछ नहीं किया जाता,जिससे कोई भी नाराज नहीं हो पाता।
    घुघूती बासूती

  6. बेंगाणी जी, आपके शरीर में जो आत्मा रहती है उसने सही खोज निकाला.
    आप संभवतः उन लोगों में से हैं जो आरएसएस (राजनीतिक मुखौटा भाजपा) द्वारा माहौल बनाए जाने पर तुंरत ये निर्णय ले लेते हैं कि पाकिस्तान पर हमला कर दिया जाए. अगर भाजपा में दम होता तो सत्ता पाने पर वह यह कारनामा कर देती. देश के लिए जान देने वाले सैनिकों की कफ़न चोरी वाला काण्ड भी उसी भाजपा की सरकार में हुआ था, अब यह न कहें कि वह भाजपा नहीं एनडीए की सरकार थी. अगर एनडीएकी सरकार थी तो कई साधु और साध्वियों को एक रुपया मीटर के हिसाब से हजारों हेक्टेयर ज़मीन आश्रम बनाने के लिए क्यों दी गयी? और आज उन आश्रमों का क्या हुआ? ज़मीन तो किसानों के हाथ से गयी न? और अब एमपी की भाजपा सरकार हेलीकोप्टर से दिखाकर बाबा रामदेव को एमपी में अपने धंधे के लिए किसानों की ज़मीन चुन लेने के लिए क्यों उकसा रही है? अगर वह ज़मीन नजूल की भी है तो क्या उसे गरीबों और भूमिहीनों में नहीं बांटा जा सकता?

    एक तो आपने अपने उद्धरण को सत्यापित करने का कोई मार्ग नहीं दिखाया, दूसरे क्या अगर ऐसा वाक़या न हुआ होता तो क्या आप कम्युनिस्टों को अपना माई-बाप मान रहे थे? लगे हाथ बताता चलूँ कि नंदीग्राम काण्ड के बाद मैं मौजूदा माकपा नेतृत्व को पसंद नहीं करता, और उसके पहले से भी.

    और अगर पांधे ने यह कहा है तो इसे राजनीति का एक कदम समझना चाहिए, कभे भाजपा के राजनीतिक कदमों की भी बखिया उधेडिये.

    खैर खिलेगा तो देखेंगे!

  7. Anunad Singh says:

    कम्युनिस्टों की प्राथमिकता की सूची में भारत का हित सबसे अन्त में आता है। इनकी पंथनिरपेक्षता दोगलेपन की पर्यायवाची है।

  8. anunad ji, aapki prathamikata men desh ka vibhajan hai, raj thakare aapke sath hain. unko samarthan dene kee taqat kisee tippanee men dikhaiye. ya kahiye ki bjp ne sikkim mudde pe kya kiya?

  9. चतुर्वेदी जी आप मुद्दों को भटकाने में माहिर हैं, असल बात पर न बोलते हुए न जाने कहाँ-कहाँ ले गये… मुलायम सिंह भी वामो के कहने (भड़काने, बहकाने) पर ही समझौते पर पुनर्विचार करने को राजी हुए, वरना मायावती के हटते ही, केन्द्र में घुसने को उनकी लार टपकने लगी थी… और संघ के बारे में दुष्प्रचार सुनने के तो हम आदी हैं, संघ के खिलाफ़ वही बोलता है जिसने संघ को करीब से नहीं देखा होता…

  10. jyotishachary Hansraj says:

    kya musalman desh ke nagarik nahi hai?musalmano ko desh se alg mat karo.or jo parti aaisa sochati hai vahi musalmano ka ahit karate hai.or aaisi bate karnevale apani mansikta bata rahe hai.aaise log hidu or musalman donoke ahit karnevale hai.ko insha apne desh ka bura nahi chahega.musalman desh ka hisha hai.vo aaisi faltubatome nahi ate .

  11. यायावर says:

    नमस्कार चतुर्वेदी जी,

    बहस को मूल मुद्दे से भटकाना तो कोई आपसे सीखे. वामपंथी विचारधारा से जनता को सपनों के सब्जबाग दिखाकर फिर सत्ता में हिस्सेदारी नहीं तो सत्ता की दलाली करके अपना उल्लू सीधा करना तो वामपंथियों की हमेशा से फितरत रही है. और अभी आप माकपा से पल्ला झाड़ रहे हैं तो इसमें भी आपका कोई दोष नहीं है क्योंकि उसने छद्म वामपंथी विचारधरा रखने वालों का दोगलापन सामने जो रख दिया है. आर एस एस को गाली देने से पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखिये असलियत पता चल जायेगी. फिर भी आपने जो मुद्दे उठायें वो भी प्रासंगिक हैं और बहस उस पर भी जरूरी है लेकिन फिलहाल जो बात संजय जी ने उठाई है पहले उस पर तो बात करिए.

    आप सबका
    यायावर

  12. विजय बाबू, मार्क्‍सवाद ने आपकी आंखों पर पट्टी लगा दी है। आपने लिखा है उद्धरण को सत्यापित करने का कोई मार्ग नहीं दिखाया।

    आपके कामरेड आका इस मुद्दे पर पंधे के बयान से स्‍वयं को अलग करने का प्रहसन क्‍यों कर रहे है। इसलिए कि इस बार मुस्लिमों ने भी कामरेडों के सिर पर जूतियां बरसाने शुरू कर दिए है।

    http://www.prabhasakshi.com/ShowArticle.aspx?ArticleId=080625-155304-060000

  13. पालितब्यूरो में बहुत जोकर हैं!

  14. G Vishwanath says:

    मुझे एक बात समझमें नहीं आती।
    वह शायद इसलिए कि मैं एक “Political Innocent” हूँ।

    मनमोहन सिंघजी को चाहिए कि आडवाणीजी से मिलकर एक युक्ति खोजें और यदि भाजपा कोई मामूले संशोधन चाहता है तो उसके लिए भी तैयार हो जाएं। कराट से क्यों मिलते हैं ?।
    कुत्ते को अपनी ही पूँछ से इतना डर क्यो?
    कितने सीट हैं इन मार्क्सवादियों के?
    अब तक सरकार की मज़बूरी थी. सरकार चलाने के लिए इन लोगों का समर्थन जरूरी था। इन मार्क्सवादियों को बहुत ज्यादा “लिफ़्ट” मिला है।
    अगर Congress भाजपा के साथ केवल इस “डील” के सम्बन्ध में समझौता करता है और “डील” का श्रेय भाजपा के साथ बराबर बाँटने के लिए तैयार हो जाता है, तो इन मार्क्सवादियों को अपनी हैसियत अच्छी तरह समझा सकते हैं।
    चुनाव होने दीजिए. I say, call their bluff.

  15. हर नेता की अपनी सोच होती है, चाहे वह महान हो या टुच्ची। अब जाहिर सी बात है कि कोई भी व्यक्ति जो निर्णय लेगा, वह उसकी सोच के अनुसार ही होगा, महान या टुच्चा।

  16. गजब की खबर ढूंढ कर लाये हैं आप. हम तो अभी तक इनको धर्मनिपेक्ष समझे बैठे थे!!

  17. ताकि मुसलमान नाराज न हो?

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