परिचय

अपने बारे में हाँकना हो तो आदमी (यानी मैं) बहुत लम्बी हाँक सकता है, नीचे लिखे को देख कर आप यह अनुमान लगा ही सकते है. यह रहा मेरा अपना संक्षिप्त(?) परिचय:

ब्लॉगरी:
हिन्दी ब्लॉगरी में साड़े तीन साल से हूँ, कोई प्रकाशक तो मेरा लिखा छापता नहीं ऐसे में तय है, लिखने की हिम्मत वहीं जवाब दे जाती. मगर धन्यवाद ब्लॉगिंग का, जहाँ हम अपने मालिक स्वयं है. हमारी इच्छा, जो चाहें – जैसे चाहें लिखें. तो हिन्दी चिट्ठाकारी जिन्दाबाद, यहाँ लिख-पढ़ रहें हैं.

शिक्षा:
जन्म राजस्थान के एक कस्बे बिदासर में हुआ, वहीं पप्पू ने पाँचवीं पास की. और फिर गुजरात के सूरत शहर आ बसे. गुजराती माध्यम से दसवीं पास की और चले गए असम. बाकी की शिक्षा जहाँ तक की वहीं की. वैश्य होने के नाते स्व-व्यवसाय ही करियर के रूप में सूझता है, अतः उसी से जूड़ा. फिर वापस गुजरात के अहमदाबाद शहर में आ गया. अब यहाँ अपनी मीडिया कम्पनी में नौकरी बजाता हूँ.

धर्म-आस्था:
जन्म एक जैन परिवार में हुआ, मगर शुरू से ही धारणा रही है कि, हम हिन्दू हैं. बचपन में पौराणिक चरित्रों में राम व ऐतिहासिक चरित्रों में राणा प्रताप से प्रभावित था. यह राजस्थान की मिट्टी का असर था या गुजरात के पानी का, समय के साथ राष्ट्रवादी विचाधारा अधिक मुखर होती गई. पढ़ाकू स्वभाव के चलते खूब पढ़ा और इससे हिन्दी के प्रति मोह गहरा हुआ, साथ ही अनीश्वरवादी भी हो गया. तर्क आधारित कारणों से मेरी ज्योतिष, वास्तुशास्त्र कर्म-काण्डों में कोई आस्था नहीं है. मैं हिन्दू समाज को जाति प्रथा विहीन अतिआधुनिक समाज के रूप में देखना चाहता हूँ.

वयक्तिगत पसन्द:
मुझे दोहरे व कमजोर चरित्र वाले व्यक्ति पसन्द नहीं. मैं भी जो लिखता हूँ, कहता हूँ वैसा ही अमल में भी लेता हूँ. कथनी-करनी के अंतर से घृणा है. जो सही लगा उसके लिए धारा से विपरीत चलने में कभी नहीं हिचका और न ही कभी अफसोस किया. वर्तमान शिक्षा पद्धति व शिक्षा सामग्री बेकार लगी तो कॉलेज बीच में ही छोड़ दी. लोकतंत्र को सर्वोत्तम शासन पद्धति मानता हूँ.

परिवार:
परिवार के मामले में अपने आपको अत्यंत सुखी पाता हूँ. संयुक्त परिवार में माता-पिता के अलावा एक भाई व एक बहन का बड़ा भाई हूँ. पत्नी भी एक ही है 🙂 और एक पुत्र है (जनसँख्या बढ़ा कर दुनिया को नर्क बनाने में अपना योगदान कम से कम हो यही उचित है). साथ ही एक प्यारे से भतीजे का ताऊ होने का गर्व भी प्राप्त है.

शौक:
खाली समय में पढ़ना, चित्र बनाना, घूमना, फिल्में देखना, टीवी देखना पसन्द है. मुझे अच्छी तस्वीरें, रंग, आकार आकर्षक लगते है. फिल्में ज्यादातर वे पसन्द है, जिन्हे मल्टीप्लेक्ष सिनेमा कहा जाता है. न भूलने वाली व सर्वाधिक देखी गई फिल्म पिंजर है. गाँधी व सरदार भी बहुत बार देखी. यशराज व करण जौहर की फिल्मे कतई नहीं देखता. मेरा यह भी प्रयास रहता है कि ज्यादा से ज्यादा वेब अनुप्रयोगों का हिन्दीकरण कर सकूँ, अतः खाली समय में वह भी करता हूँ. शुद्ध हिन्दी न लिख पाने का अफसोस सदा बना रहता है.

10 Responses to “परिचय”

  1. Garima says:

    “PINJAR” meri bhi sarwadhik priy film hai…..jitne bar bhi dekho …man hi nahi bharta….aankhe to sawan-bhado ki jhadi laga deti hai….

  2. namaskar
    aapne apne parichay me likha hai ki aapko shuddh hindi nahi likh paane ka afsos hai. bia kisi aatm-shlaghaa ke mai aapko yah sahyog kar sakta hu ki jab bhi aapko lage ki aapko hindi(ya angreji bhi- kyonki 16 baras hitvaad aur Hidustan times me kaam karne ke baad kaam chalaane ke laayak angreji bhi aane lagi haa, poora gyata to khair ho hi nahi sakta. urdu ka bhi shauk gambhirta se rakhta hu) me kuchh sahbd ke prati shanka ho to mujhe yaad kar sakte hain.
    achcha lagaa ki aap apna blog banaakr kary kar rahe hai. iske lye jid aur commitment chahiye jo aapki baaton se jhalakta hai.
    dhanyvaad
    vibhash jha

  3. अहमदाबाद आया तो आपसे मिलने आने की कोशिश करूंगा। हो सकता है आपके पास समय न हो, लेकिन मैं कोशिश करूंगा।

  4. ePandit says:

    अच्छा लगा आपके बारे में जानकर, फोटू मस्त लगाई है। 🙂

    शुद्ध हिन्दी न लिख पाने का अफसोस सदा बना रहता है

    पिछले कोई दो साल से वैसे आपने अपनी हिन्दी वर्तनी काफी सुधार ली है, पहले जहाँ एक पोस्ट में दसियों गलतियाँ (वो भी मेजर गलतियाँ) होती थी, अब बहुत ही कम (वो भी माइनर) होती हैं।

    केरियर –> कॅरियर
    सुझता –> सूझता
    धारणा रही है की –> धारणा रही है कि
    पढ़ाकु –> पढ़ाकू
    जाती प्रथा –> जाति प्रथा
    जनसंख्या –> जनसँख्या
    उच्चीत –> उचित
    फिल्मे –> फिल्में
    मल्टीप्लेक्ष -> मल्टीप्लॅक्स
    ज्यादतर –> ज्यादातर
    कर सकु –> कर सकूँ

  5. जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं…..!!


    शुभेच्छु

    प्रबल प्रताप सिंह

    कानपुर – 208005
    उत्तर प्रदेश, भारत
    मो. नं. – + 91 9451020135

    ईमेल-
    ppsingh81@gmail.com
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    ब्लॉग – कृपया यहाँ भी पधारें…
    http://prabalpratapsingh81.blogspot.com
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    मैं यहाँ पर भी उपलब्ध हूँ.
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    http://www.birthdayalarm.com/dob/85420908a292859852b363
    http://www.rupeemail.in/rupeemail/invite.do?in=NTEwNjgxJSMldWp4NzFwSDROdkZYR1F0SVVSRFNUMDVsdw==

  6. neelkamal says:

    Sanjay ji ,

    Aaj achanak hi antarjal ko khangalte hue aapka blog ya keh le website padi , padkar atayant prasannta huye ye dekh kar aaj bhi hindi kayam hai is bharatvarsh mein , kabhi kabhi to darr lagta tha ki kahin hindi is desh se lupta na ho jaye. Jahan dekho angreji ka bolbala , interview jao to english, school , college har jagah english.

    Jis tarah hum Angrejo ki banaye bhasha ka upyog itni joro shoro se karte hai , kya hum apni matra bhasha ko itna uncha nahi utha sakte ki log hamari bhasha bole.

    apke vicharo ka intezaar rahega.

  7. Drpundir says:

    आप का ब्लॉग पढ़ा. रोचक, आपका लेखन रोचक है.

  8. अहमदाबाद आया तो आपसे मिलने आने की कोशिश करूंगा।

  9. नमस्कार!
    इस संक्षिप्त परिचय के माध्यम से आपके बारे में जानकर अच्छा लगा. आप अच्छा लिखते हैं और वेब अनुप्रयोगों के हिन्दीकरण का भी प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं. कभी मौका मिला, तो आपसे अवश्य मिलना चाहूंगा. मेरी शुभकामनाएं!

  10. आप अच्छा लिखते है , मै भी आप के जैसा लिखने की क्षमता विकसित करना चाहता हूँ |
    कभी समय निकल कर् जगदलपुर पधारें | हमें सेवा का अवसर दें |
    धन्यवाद

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