ब्लॉगर-मिलन, कोलकाता के शिवकुमार मिश्रजी से मुलाकात

बिते कुछ दिन ब्लॉगर-मिलन के हिसाब से हमारे लिए फलदायी रहे है. रतनसिंहजी व ललीतशर्मा जी के बाद कोलकाता से शिवकुमार मिश्रजी हमारे शहर पधारे. हमारे शहर से जितेन्द्र प्रतापसिंह है जो फैसबुक पर ‘भीषण’ सक्रिय है, मगर ब्लॉगिंग में वे है नहीं, इसलिए ब्लॉगरों का मिलन कोई मेहमान बन कर शहर आए तभी हो पाता है.

ब्लॉगर मिलन का अपना महत्त्व व सुख है. एक दुसरे की प्रशंसा व बाकि सभी जो उपस्थित नहीं है उनकी निंदा की हद तक आलोचना बेहद सुखदायी होती है. इसलिए मिलन को तरसते रहते है. 2 फरवरी 2012 को ऐसा ही सुख प्राप्त करने का मौका हाथ लगा तो उसे हाथो-हाथ लिया. शिवकुमारजी बोले आ रहें है, हमने कहा जो व्यवस्था चाहिए कर देंगे मगर आ ही जाओ. टालना मत. ( बहुत दिन हुए अपने चिट्ठे की प्रशंसा सुने, कोई आए तो शर्म से ही सही दो शब्द प्रशंसा के कहेगा ही).

शिव कुमार मिश्र - संजय बेंगाणी

शिव कुमार मिश्र - संजय बेंगाणी

वे तय कार्यक्रम के अनुसार दो तारीख को शताब्दी से अहमदाबाद आ पहूँचे. हॉटल में उनका कमरा पहले से ही आरक्षित था. उन्हें वहाँ पता बता दिया और वहीं मिलने का वादा भी किया. शाम को उन्हें होटल से उठाया और खाने का लालच देकर घर ले आए. यहाँ अराम से तेरी वाह-वाह, मेरी वाह-वाह हो सकती थी.

हमने पहले तो ‘भाई-दूर्योधन’ की तरफ से उनकी डायरी चूराने के लिए उल्हाना दिया. फिर डायरी के रहस्य उगलवाने का प्रयास किया. फिर यहाँ-वहाँ. रतिराम, हल्कान भाई सभी को याद किया. खूब वाह वाह भी की. अब मुफ्त में इन पात्रों का मजा लेते है तो थोड़ी बहुत वाह-वाह तो कर ही सकते है. फिर उनकी प्रतिक्षित कीताब के बारे में पूछा कि अब तक छपी क्यों नहीं? इसके पीछे भी कारण यह है कि हम उम्मीद से थे कि एक मुफ्त की प्रति जरूर मिलेगी.

थोड़ा राजनीति, थोड़ा व्यवसाय-वाणिज्य, थोड़ा ब्लॉगर-बन्धू, थोड़ा नारद से ब्लॉगवाणी तक… यह सब निपट गया. मगर मुद्दा हमारे ब्लॉग तक नहीं आ पाया. माना हमने ऐसा कभी लिखा ही नहीं कि कोई तकादा करे कि बहुत दिन हुए लिखते क्यों नहीं. अब जैसा भी लिखा हो मेजबान का फर्ज है कि थोड़ी प्रशंसा करे. खैर बहुत घूमा फिरा कर याद दिलाने कि कोशिश की. यहाँ तक कि उनके द्वारा पढ़े जा रहे ब्लॉग की सूची भी पूछ ली. मगर नहीं…. अब तक हमें लगने लगा था कि शाम का खाना यूँ ही गया.. तभी माँ सरस्वति की उन पर कृपा हुई. बोले ज्ञानभैया और आपका ब्लॉग सही में ब्लॉग की तरह लिखा जाता है. सही कहें जान में जान आई. प्रसन्नता के मारे लगा उन्हें बुला लाना सफल रहा. पत्नी से कह दिया, जरा ठीक से आवभगत करना ‘अब’ ये अपने ही आदमी है.

इन सब के दौरान अद्वैत शिवकुमारजी के स्लीम-ट्रीम-सैक्सी स्मार्ट-फोन पर कार्टून फिल्में देखता रहा. हमने भी फोन की प्रशंसा की, जोरदार लग रहा है. स्मार्ट भी है. हिन्दी जानता है? शिवजी ने गर्दन हिला कर मना किया. सही है जब स्मार्टनेस आती है हिन्दी सबसे पहले भूली जाती है. हमने कहा ये मुक्त अनुप्रयोग वाले तीरमार खाँ बनते है बाकि जो दिन-रात गालियाँ खाते है उन्हें देखो क्या मस्त हिन्दी समर्थन देते है. झट से अपना आई-पेड निकाला और उसका हिन्दी कूँजिपटल दिखाया तो शिवजी देखते रह गए. हमने उनसे कहा कि सैमसंग को मेल मारो कि ‘डिब्बे’ देखने के लिए तेरा महंगा उत्पाद नहीं खरीदा है. उन्होने हामी भरी.

अगले दिन भी उनके साथ थे. यह उनकी निजि यात्रा थी अतः उसका विवरण नहीं दे सकते. उससे अगले दिन उन्हें साबरमति आश्रम ले गए. आश्रम को अब और ठीकठाक कर दिया गया है. शुक्र है कि कांग्रेस सरकार नहीं है. यहाँ से उन्हें हमारे कार्यालय ले आए. जहाँ ब्लॉगर-धर्म का पालन करते हुए फोटो ली गई. यह चुक हमसे रतनसिंहजी व ललीतशर्मा जी के समय हो गई थी. तो याद रख कर फोटो ले ली. दुपहर की उड़ान से वे कोलकाता के लिए रवाना हुए.

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24 Responses to “ब्लॉगर-मिलन, कोलकाता के शिवकुमार मिश्रजी से मुलाकात”

  1. यही माहौल बना रहे..

  2. बहुत-बहुत ख़ुशी हुई आपके शहर जाकर और आपसब से मिलकर. अगली बार जाऊंगा तो सुरेन्द्र जी से भी मिलना होगा. बहुत सुखद रही यात्रा आपके शहर की. और जैसा कि मैंने कहीं लिखा कि आपका शहर देखकर उसमें बस जाने की इच्छा भी खूब हुई. गाँधी आश्रम जाना बहुत अच्छा लगा. वहाँ सबकुछ देखना बड़ा भावुक कर देता है. साथ ही अपनी जमीन से जुड़ने क्यों ज़रूरी है, यह भी बताता है.

    यह बिलकुल मेरे मन की बात है कि आप और ज्ञान भैया ब्लॉग को ब्लॉग की तरह ही लिखते हैं. छोटी पोस्ट छप गई और उसपर आई तमाम टिप्पणियों से पूरी हुई. सैमसंग को हम २ दिन में ही चिट्ठी लिखेंगे.

    और संजय भाई, एक-दूसरे की वाह-वाह न हो तो फिर ब्लॉगर होने का क्या फायदा? अगली बार आपके शहर में जाऊँगा तो पहले से सूचित करूंगा ताकि आप ब्लॉगर मिलन के साथ-साथ कुछ पुरस्कार वगैरह की व्यवस्था भी करें:-)

    बहुत-बहुत धन्यवाद.

  3. अच्छा लगा…

  4. इसी बहाने मिसिर जी से भी मिल लिए हम तो…

  5. आपका चिटठा बहुत ही अच्छा है… हम प्रशंसा कर रहा हूँ…

    अच्छा … एक बात तो है… काफी दिन हो गए बात किये हुए… नंबर तो वही है न… ?

  6. काजल कुमार says:

    बेचारे हिन्दी अनुप्रयोग वाले 🙂

  7. लीजिये तगादा हमने कर दिया. 😯
    बाकी शिवकुमार जी से मुलाक़ात सचमुच जान में जान डालने वाली है

  8. 😉 ई मिशिर जी को जरा हमरे स्कूल का पता भी तो जरा बताइये …..बस ऊ प्रतीक्षित किताब वाली बात दिमाग में नाच रही थी …बस्स और कुछ नहीं 🙂

  9. बढ़िया मिलन!!

  10. नीरज रोहिल्ला says:

    शिवकुमार मिसिर जी तो पुराने (प्री २००७) ब्लागर हैं, उनसे चर्चा थोडी विस्तृत होनी चाहिये।
    असल में इस प्रकार की चर्चा भोजन से पहले की जानी चाहिये और भोजन को जानबूझ कर थोडा विलम्बित कर देना चाहिए जिससे ब्लागर को लगे की होने वाली खातिर “वाह, साधुवाद और प्रशंसा” के समानुपाती होगी।
    वैसे चलिये हम इसी से काम चला लेंगे 🙂

  11. rachna says:

    आप से मिलने का मन तो हमारा भी हैं आप लिखते ही इतना अच्छा जो हैं और ये शिव मिश्र कौन हैं 😀 कभी नाम नहीं सुना इनका पहले . 😛

  12. रवि says:

    तगादा?
    ब्लॉग जगत में तो आउट आफ साइट, आउट आफ माइंड का फंडा चलता है. अतः साइट पर अपनी मौजूदगी दर्शाते रहें 🙂

  13. वाह, अदभुत ब्लॉगर मिलन… इस प्रकार एक-एक करके ही मिलें तो बेहतर रहता है… “आपस” की बात आपस में रह जाती है, बशर्ते कोई “डायरी मास्टर” पोल खोलने पर उतारू न हो जाए… 🙂 बाकी हिन्दी ब्लॉगिंग के इतिहास तथा उसके स्वर्ग-नर्क-गर्त-शिखर पर जाने की चर्चा के लिए विभिन्न सम्मेलन तो हैं ही…
    मिसिर जी और आप “प्रागैतिहासिक” काल के ब्लॉगर हैं, तो चलो आपको नमन कर ही लेते हैं… 🙂 आपकी देखादेखी मिश्रा जी भी टी-शर्ट पहन कर जवान बनने की कोशिश करते दिख रहे हैं… hehehehe

  14. ePandit says:

    आप दोनों की वाह-वाह। जबरदस्त मिलन रहा।

  15. पुरस्कार बिना सही में सुना रहा 🙂

  16. amit says:

    ब्लॉगर मिलन का अपना महत्त्व व सुख है. एक दुसरे की प्रशंसा व बाकि सभी जो उपस्थित नहीं है उनकी निंदा की हद तक आलोचना बेहद सुखदायी होती है. इसलिए मिलन को तरसते रहते है.

    हा हा हा! 😀

    मामला बढ़िया रहा, कहीं तो ब्लॉगर मीट हो रही हैं और इसी बहाने आपने लगभग साल भर बाद (बस अभी ही चैक किया पिछली पोस्ट की तारीख) कुछ ठेला तो सही! अपन भी अपने को बहुत अवॉयडिड सा महसूस कर रहे थे इसलिए टिप्पणी ठेलने चले आए कि कोई तो लिंक क्लिक कर आएगा! 😉

  17. 🙂 ये तो चकाचक मिलन हो गया। 🙂
    फोटॊ-सोटो भी हो गये।
    तारीफ़ वाली लिस्ट में हमारा नाम तो रहा ही होगा इसलिये संयुक्त-शुक्रिया भी। 🙂
    दुर्योधन से पहले कभी धृतराष्ट की डायरी भी छपती थी चिट्ठाचर्चा में। लिंक यह रहा http://chitthacharcha.blogspot.in/2007/01/20-01-2007.html
    धृतराष्ट्र जी की डायरी फ़िर से लिखी जाये न! 🙂

  18. चकाचक मिलन-कथा। 🙂

    हमारी तारीफ़ तो पक्का हुई होगी इसलिये संयुक्त शुक्रिया। 🙂

    दुर्योधन की डायरी लिखना शुरु किये जाने के पहले एक ठो धृतराष्ट्र की डायरी भी लिखी जाती थी। उसे संजय बेंगाणी लिखते थे। एक ठो लिंक ये रहा http://chitthacharcha.blogspot.in/2007/01/20-01-2007.html डायरी फ़िर से लिखना शुरू किया जाये न! 🙂

  19. अरे भाई दो टिप्पणी की और छपी एक्को नहीं। 🙂

    शानदार च जानदार ब्लागर मिलन का किस्सा लिखा। 🙂

    हमारी तारीफ़ त किये ही होंगे इसलिये संयुक्त शुक्रिया तो बनता है। 🙂

    कभी संजय बेंगाणी भी डायरी लिखते थे धृतराष्ट्र जी की http://chitthacharcha.blogspot.in/2007/01/20-01-2007.html अब फ़िर से लिखी जाये कभी-कभी।

  20. हाँ जी शुक्लजी आपकी की भी बात हुई प्रशंसा भी हुई थी. 😆

  21. विश्वनाथ जी के पास “सेमसंग गेलेक्सी नोट” देखा था। उसमें हिन्दी लेखन की सुविधा थी।

  22. sanjay says:

    शिव भैया की एक किताब की तो हमें भी प्रतीक्षा है|

  23. सुंदर और सुहाना लगता है ब्लागर मिलन? पीठ थप थपाने और थप थपवाने का आनंद आपने बडी खूबसूरती से बयान किया है.

    मिश्रजी के सुझावानुसार अगली बार ब्लागर मिलन में पुरस्कार की व्यवस्था हो तो हमको भी याद कर लिजियेगा, पास ही हैं, हाजिर हो जायेंगे.:)

    रामराम

  24. तकादा तो हम करने ही वाले थे लेकिन उसके पहले आपकी पोस्ट ही आ गई 😀 वैसे मिश्राजी के फ़ोटू तो छाप दिए लेकिन जो ‘आवभगत’ पेश की गई उसके फ़ोटू मिसिंग हैं 😀

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