भोपाल की चौपाल । भाग 1

media-chaupal-2012भोपाल में आयोजित मीडिया चौपाल-2012 को सफलता पूर्वक आयोजित करने के लिए अनिल सौमित्र जी व उनके साथियों को बधाई देता हूँ. बहुत ही सुन्दर आयोजन था. शानदार व्यवस्था रही. मेहमानों को ठहराने-खाने-पीने-लाने-ले जाने वगेरे का प्रबंध भी सुन्दर था. यही वजह है कि एक बार फिर मिलने का मन लिए सभी प्रसन्न मन से लौटे हैं.

अब जो लिख रहा हूँ इसे आलोचना न समझा जाय क्योंकि बहुत ही प्रसन्न मन से लिख रहा हूँ, इसे सुझावों की श्रेणी में डाला जाय.

चौपाल2012 का जो विषय था उसको लेकर मैं थोड़ा ज्यादा ही उत्साही था क्यों कि इस क्षेत्र में हम शौकिया नहीं बल्कि व्यावसायिक दखल रखते है, जिसे विशेषज्ञ या गुरू जैसे शब्दों से परिभाषित किया जा सकता है. चूंकि नए मीडिया पर कार्यक्रम था तो मैं आशा कर रहा था कि वहाँ नेट कनेक्शन तो मिलेगा ही. मगर पूरे कार्यक्रम के दौरान मेरा मोबाइल वाय-फाय खोजता रहा….

एक सूची जो मेरे दिमाग में थी/है जो इस तरह के आयोजन में लागू होनी चाहिए. यहाँ तक कि ब्लॉगर मिलन समारोह हो तब भी इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए. ये अति साधारण मगर अतिप्रभावी है.

वाय-फाय नेट कनेक्शन उपलब्ध हो.

ट्विटर पर सम्बन्धित आयोजन का एक # (हेज) टेक बनाएं. उस आयोजन पर तथा आयोजन के समय की जाने वाली सारी ट्विट उस हेज टेग के साथ हो.

सहभागियों द्वारा फोरस्क्वायर वगेरे में सम्बन्धित स्थान पर चेक-इन हो.

फेसबुक पर इवेंट बनाकर वहीं से निमंत्रण दिया जाय. अन्य लोगों द्वारा अपनी टिप्पणी वहाँ दर्ज हो.

यूट्युब पर चैनल बना कर आयोजन के वीडियो रखे जाएं.

फोटो साझा करने की सुविधा देने वाली किसी साइट पर सारे फोटो एक जगह भी रखे जाएं.

आयोजन सम्बन्धि ब्लॉग बनाया जाय.

आयोजन का युस्ट्रीम जैसी किसी साइट से वेबकास्ट हो.

अन्य चीजें भी शामिल की जा सकती है, जो इस सूची में नहीं है क्योंकि मेरे लिखने और आपके पढ़ने के बीच के काल में भी तकनीक जाने कितनी बदल गई होगी. हम हर दिन तकनीक से एक दिन पीछे हो जाते है.

***
प्रश्न कर सकते है कि जब सुझाव मांगे गए थे तब क्यों नहीं बताया, तो ये अति साधारण वस्तुएं है, और मैं समझता था कि यह सब तो होना ही है अतः ज्यादा उस्ताद क्यों बनें? 😆

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11 Responses to “भोपाल की चौपाल । भाग 1”

  1. हमने सोचा कि आपने व्यवस्था करवा रखी होगी 🙂

    वैसे आप सभी से मिलकर मन प्रसन्न हो गया।

  2. @ललित शर्मा : प्रसन्नता का तो ऐसा है कि मन अभी तक खिला हुआ है.

  3. सुझाव बड़े सार्थक हैं!

  4. वहां के किस्से बताने चाहिये!

  5. हम सुनने के इंतजार में हैं। 🙂

  6. यह सब तो उतना ही जरूरी है जितना कार्यक्रम में चाय-पानी की व्यवस्था… 🙂

  7. सुझाव के साथ क्या हुआ …..ई भी जानना चाहते हैं जी !

  8. सुझाव जरूरी हैं, हम तो किस्से पढ़ने आये थे, जानकारी लेने, कब तक इंतजार करवायेंगे ।

  9. अच्छा ये बच्चे बच्चे को मालूम तकनीके हैं तो फिर वहां और वह भी विज्ञान और तकनीक विभाग में थी क्यों नहीं?

  10. amit says:

    यह चीज़ें आज के समय में किसी भी सम्मलेन आदि में होनी चाहिए, खासतौर से तब जब उसका सम्बन्ध तकनीकी से हो, लेकिन समस्या वही है की समयाभाव अथवा साधनों की कमी की वजह से यह नहीं होता अथवा आयोजकों की अपनी ही कोई रूचि नहीं होती इन चीज़ों में.

  11. यह सब बातें बहुत ही आवश्यक है..

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