मनमोहन-वाद का आम जन-जीवन पर प्रभाव

शेर (शायरी वाला) न हुआ जंगल का राजा (शेर) हो गया. सब पर भारी. जंगल का राजा जो चाहे वही न्याय. और शायरी वाला शेर पढ़ दो तो सारे अपराध माफ. इसे कहते है मनमोहन-वाद.

जब से मनमोहनवाद स्थापित हुआ है, इसका प्रभाव व्यापक होता जा रहा है. कुछ उदाहरण देखें.

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मालकिन: री… कम्मो.. देख झुठ मत बोलना, तुने चीनी चुराई है कि नहीं?
नोकरानी: चुराई होगी, मगर आपको कोई नुकसान नहीं हुआ है. मैने ले जा कर रख दी है, उपयोग में नहीं ली है. जीरो लोस बिविजी.
मालकिन: चुप कर, जबान लड़ाती है.
नौकरानी: बिविजी अगर यही बात है तो मैं जिम्मेदारी लेती हूँ, आप एक शेर सुनो…

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पिता: नालायक इतने कम नम्बर क्यों आए? कुछ पढ़ा-लिखा भी था?
बेटा: एक शेर सुनिये… पढ़ पढ़ पोथा पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय…
पिता : कमबख्त, यह दोहा है, शेर नहीं…
बेटा: हम अनपढ़ों के लिए क्या शेर, क्या दोहा… अभी भी गुस्से में हो तो एक शेर और सुनाऊँ?

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जज: क्यों रे तुने डाका डाला है, बताते हैं.
डाकू: गाँव वाले बे फालतु चिल्लाते है, आपका टेम भी खोटी कर रहे है. अनपढ़ों को ज़ीरो-लोस-थ्योरी का नॉलेज नहीं है.
जज: मगर सबूत बताते है कि तुने डाका डाला है.
डाकू: ठीक है, मैं जिम्मेदारी लेता हूँ. आप एक शेर सुनिये… और मामले को रफा-दफा करिये…

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प्रेमिका: तुम मुझे धोखा दे रहे हो… उस कलमुही के साथ कल क्या कर रहे थे?
प्रेमी: सब अफवाह है जानेमन, किसी की मत सुना करो.
प्रेमिका: क्या किसी की मत सुना करो, मैने अपनी आँखों से देखा है…
प्रेमी: अच्छा!! अपनी आँखों से देखा है? तो मैं जिम्मेदारी लेता हूँ, एक शेर सुनो…

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यह खाली-फोगट की पोस्ट आपको पंसद न आई हो तो मेरा एक शेर सुनो… 😆

फैसबुक ने बरबाद कर दिया हमें तो,
वरना ब्लॉगर हम भी थे काम के…

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7 Responses to “मनमोहन-वाद का आम जन-जीवन पर प्रभाव”

  1. Ranjan Jain says:

    शानदार….. मजा आ गया ! एक शानदार चुटकी याद आई खबरबाजी.कॉम से !

    मनमोहन सिंह को समझना चाहिए की जिंदगी में सवालों के जवाब देकर ही आगे बड़ा जा सकता है ! अगर हर बच्चा सवालों से बचने लगे तो कभी अगली कक्षा में ना पहुंचे !

  2. Kajal Kumar says:

    …लेकि‍न आपका शेर तो बहुत उम्‍दा है 🙂

  3. पर आपके नियमित नहीं लिखने/कम लिखने से तो बहुत बड़ा लोस हुआ है।
    मजेदार दोहे/शेर और पोस्ट

  4. हमें तो कोई शेर सूझता है..ऐसी परिस्थितियों में..

  5. रवि says:

    ये तो जीरो लॉस थ्योरी का सर्वव्यापीकरण है. इसमें और भी बहुत सारे नियम-थ्योरी जोड़े जाने चाहिएं.
    बढ़िया व्यंग्य 🙂

  6. वाह वाह!, हम टिप्पणी क्या करें, आप तो एक शेर आई मीन दोहा सुनो….

  7. Ranjana says:

    शेर ग़ज़ल न कह पाने की सामर्थ्य का आज जितना अफ़सोस आजतक नहीं हुआ था…

    काश कि मुझे भी शेर कहना आता तो आपके इस लाजवाब पोस्ट पर हम तो शेरों की बारात छोड़ देते..

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