महत्व त्याग का है, कारण में क्या रखा है?

भारत की भूमि त्यागियों के त्याग से भरी पड़ी है. ना-ना प्रकार के त्यागी है. वस्तुतः त्याग भारतीयों के जीवन का हिस्सा है. हम हर पल हर क्षण त्याग करने के लिए उद्यमशील रहते है. कब मौका मिले और कब त्याग करें. कोई आपके रूपये छीन कर भाग रहा है, आत्मा तत्काल जागृत हो कर त्याग करने के लिए प्रेरित करती है और आप कहते है, जा ले जा मैनें तुझे दान किया. परिणाम यह होता है कि भगवान के खाते में लूटमार की घटना दानपूण्य की घटना के रूप में दर्ज हो जाती है. घर-गृहस्थि का बोझ सम्भाल नहीं पा रहे हो तो घर त्याग कर संन्यासी का चोला पहन लो. कोई भगौड़ा नहीं कहेगा क्यों कि आप भागे नहीं है, त्याग किया है. घर-संसार के सुखों का त्याग किया है.

वर्तमान में त्यागी तो बहुत है, मगर स्वर्ण अक्षरों में नाम लिखा जाय ऐसा त्यागी कोई नहीं दिख रहा . इतिहास चिंतित है. उसकी स्वर्ण-स्याही सुख रही है. लिखे भी तो किसका नाम लिखे. मगर भारत की भूमि का सबको पता है कि बहुत उर्वर है. इस युग में भी ऐसे त्यागी हुए हैं जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. एक बड़ा त्यागी, एक छोटा त्यागी. नहीं नहीं ये कोई गैंगस्टर नहीं है. छोटा-बड़ा केवल त्याग का स्तर है. एक ने प्रधानमंत्री पद का त्याग किया, बड़ा त्यागी. एक ने मुख्यमंत्री का पद त्याग किया. छोटा त्यागी. बंधुओं, महत्व त्याग का है, कारण में क्या रखा है?

# लोग मेरी बात को मजाक में ले लेते है, भई यह मजाक नहीं गम्भीर व्यंग्य है 🙂

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *