मान गए उस्ताद

अब एशिया में एक ही तो उस्ताद है, चीन. चीन का मैं कटु आलोचक रहा हूँ, और कोई मौका आलोचना का चुकना नहीं चाहता. मगर यहाँ बात जरा प्रशंसा की. अपन कोई भारतीय मीडिया तो है नहीं की जो एक आँख से देखता रहता है. अपन तो जैसा देखते है, वैसा लिखते है.

ऑलम्पिक का आयोजन कोई छोटी मोटी बात नहीं, अपना देश तो अभी दूर दूर तक ऐसे आयोजन की सोच भी नहीं सकता. खैर चीन ने कर दिखाया है, और लगता है पदक तालिका में भी अव्वल रहने वाला है. शाबासी.

अब वह बात जिसके लिए यह पोस्ट लिखने की इच्छा हुई, आपने ऑलम्पिक की साइट देखी है? नहीं देखी हो तो जरूर देखें. यह रही कड़ी. रंगरूप, सामग्री हर लिहाज से यह साइट परिपूर्ण लगती है, उतनी ही विस्तृत भी है. लगता है इसके पीछे भी काफी समय और मानवश्रम लगा है. साथ में देखना चाहें तो उतनी ही एक बेकार साइट भी देख लें, यह है दिल्ली में होने वाले कॉमन-वेल्थ खेलों की साइट. कृपया इसे यहाँ देखें. अब आप कहेंगे की भैया ऑलम्पिक और कॉमन वेल्थ में फर्क नहीं है क्या? तो जनाब 2014 के कॉमन वेल्थ खेलो की साइट भी यहाँ देख लें, फर्क समझ में आ जायेगा.

मगर चीन को शाबासी उसकी असली उस्तादी दिखाने के लिए मिलेगी. चीन का सिद्धांत है की हो न हो मगर चकाचक दिखो जरूर. तो उसने सबसे पहले उद्घाटन समारोह में गायिका बच्ची को ही बदल दिया. कोई गलत नहीं किया. दिखाने और खाने के दाँत अलग ही होने चाहिए. फिर कहते है पटाखे चले ही नहीं, मेड-इन-चाइना थे, फूस्स हो गए. तो जो नजारे परदे पर दिखे वे कम्प्युटरीकृत थे. अब एक नई सुगबुगाहट हो रही है, चीनी एम्पायर पक्षपात कर रहे है. कहना होगा मान गए उस्ताद.

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7 Responses to “मान गए उस्ताद”

  1. कुश says:

    हा हा हा तीनो ही साइट्स देखी.. बहुत सही लिखा आपने.. दरअसल सरकार का काम ऐसा होता है ना की प्राइवेट कंपनिया हाथ में नही लेती.. और सरकारी विभाग में काम कुछ ऐसे ही होते है..
    हमारे पास भी जब सरकारी विभाग की वेब साइट बनवाने का प्रपोज़ल आता है तो हम माना कर देते है

  2. सरकारी काम भी सही हो सकते हे, 🙄 बस हमे ओर सरकार को दोनो को सुधरना होगा, 😳 नोकर शाही, चाप्लुसी, ओर खुद गर्जी से ऊपर ऊठना होगा,ओर 🙂 देश प्रेम की भावना को जगाना होगा,तभी हम ओर देश आगे बढे गा 😆

  3. sangita puri says:

    आज दुनिया में ग्लैमर ही चल रहा है। किन्तु प्रतिभा का मूल्य तो होना ही चाहिए। अब खेल के मैदान में भी प्रतिभा को महत्व नहीं मिलेगा , तो फिर कहां इसकी उम्मीद की जा सकती है

  4. shobha says:

    बहुत अच्छा लिखा है। स्वतंत्रता दिवस की आपको बहुत-बहुत बधाई।

  5. चकाचक लिखा..मान गये संजय उस्ताद!! 😆

    स्वतंत्रता दिवस की आपको भी बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  6. दिल्ली – २०१० की साइट की सादगी पर कुर्बान हुये हम! 🙁

  7. Amit Gupta says:

    ओलंपिक खेलों की वेबसाइट चकाचक है। 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों की भारतीय वेबसाइट एक आम भारत सरकार की वेबसाइट माफ़िक बाबा आदम के ज़माने के होमपेज माफ़िक है। जानने वाले सभी जानते हैं कि इन वेबसाइटों को कौन बनाता है। NIC वाले बनाते हैं तो उनके पास कोई डिज़ाइनर नहीं जो अभी बीस वर्ष पहले के होमपेजों की दुनिया से बाहर निकला हो, न ही वे किसी प्रोफेशनल डिज़ाइनर को नौकरी पर रखते हैं। और यदि ये किसी को ठेका देकर बनवाई गई है तो भी पता ही है कि कैसे ठेका मिला होगा उस कंपनी/डिज़ाइनर को! 👿 और रही 2014 के ग्लासगो में होने वाले खेलों की वेबसाइट तो वह भी कोई खास नहीं है, एक टिपिकल अंग्रेज़ों की सरकारी वेबसाइट अथवा अंग्रेज़ों के विश्वविद्यालय की वेबसाइट माफ़िक है, बिलकुल ही नीरस और बदमज़ा, क्योंकि काम वहाँ पर भी ऐसे ही होता है जैसे हमारे यहाँ, आखिर हमारे यहाँ उन्हीं से विरसे में मिला सिस्टम तो चल रहा है!! 🙄

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