मैं भारत का भावी प्रधानमंत्री बोल रहा हूँ, मगर…

जनता से दूर लेजाता अंग्रेजी मोह

जनता से दूर लेजाता अंग्रेजी मोह

मैं भारत का भावी प्रधानमंत्री बोल रहा हूँ, मगर तुम्हारी समझ में नहीं आएगा… क्योंकि मैं अंग्रेजी में बोल रहा हूँ. मेरे सलाहकारों ने कहा है की भारतीय बड़े लघुग्रंथी के साथ जीते है. गोरी चमड़ी और अंग्रेजी वाणी पर न्योछावर रहते है. फिर मुझे अमेरिकावासियों को भी प्रभावित करना था, मैं कोई ऐरागैरा नहीं उनकी भाषा पर अधिकार रखने वाला हूँ. मगर चिंता मत करना मैं तुमसे मत हिन्दी में ही माँगने आऊँगा, तुम्हें अंग्रेजी जैसी साहबी भाषा नहीं आती ना इसलिए. बस मेरी संसद में हुई इस मूर्खता के लिए मुझे सदा के लिए सम्भावित भावी प्रधानमंत्री ही मत रहने देना.

***

मनमोहन सिंहजी द्वारा लाये गए विश्वास प्रस्ताव के दौरान संसद में विपक्षीनेता आडवाणीजी को इस महत्त्वपूर्ण मौके पर अंग्रेजी में सुन आहत हुआ, यूँ मूर्खता से एक अच्छा मौका गँवा देने की उनसे उम्मीद नहीं थी.

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

11 Responses to “मैं भारत का भावी प्रधानमंत्री बोल रहा हूँ, मगर…”

  1. sajeev says:

    संजय भाई सब एक थाली के चट्टे भट्टे हैं, इनसे उम्मीदें बेकार हैं, अब अगर हम बदलाव चाहें तो आज के युवा को ही अपनी तरफ़ से पहल करनी पड़ेगी….

  2. आडवानी सम्भवत औपचारिकता पूरी कर रहे थे!

  3. बात भाषा की ही नहीं है. आडवाणी के पास कोई मुद्दा भी नहीं दिख रहा था. अब जबरी हम आडवाणी को देश पर थोप ही दें तो और बात है, वे उस लायक हैं नहीं.

  4. अरूण says:

    देश वासियो की जरूरत वोट मांगने जाते समय के अलावा पडती नही है जी बाकी समय ये देश वासियो के लिये नही बोलते उस समय ये अमेरिका ब्रिटेन के लिये बतियाते है जी , खामखा दिमांग मे परेशानी ना पाले 🙂

  5. जीतू says:

    मै इसको गलत नही मानता। संसद मे ढेर सारे दक्षिण भारतीय सांसद है, जो हिन्दी ठीक से बोल/समझ नही पाते, उनको प्रभावित करने के लिए अंग्रेजी मे बोलना गलत नही था। संसद मे अंग्रेजी भाषा मान्य है, इसलिए तकनीकी रुप से भी कुछ गलत नही था।

    रही बात मतदाताओं की, संसद की कार्यवाही देखने से बेहतर, वे लोग एमटीवी पर आगे या स्टार टीवी के सास बहू के सीरियल देखना पसन्द करते है। जो जानकार है, वे भी लाइव रिकार्डिंग ना देखकर, किसी खबरिया चैनल पर समीक्षा देखना ही पसन्द करते है।

    मेरे को जो बात खली वो ये है कि नेता विपक्ष ने कांग्रेस पर कड़े प्रहार नही किए, शायद ये दो दिन पहले हुई फ्रांस के राजदूत से मुलाकात का असर है या मायावती के बढते कद का डर। बीजेपी इस सरकार को गिराने का आरोप अपने मत्थे ना लेगी, भले ही वो लाख इसके वादे करती रहे। लेकिन इस तरह के साफ़्ट अटैक से तो बेहतर था, आगे बढकर, सरकार का साथ देते, तो निसंदेह इतिहास मे इनका नाम होता।

  6. जीतू भाई से पूर्णतः सहमत, यह मायावती की सक्रियता का ही नतीजा है कि सरकार आसानी से बच जायेगी… लेकिन फ़िर भी मायावती को अगले 5-10 वर्ष के भीतर ही हम प्रधानमंत्री के रूप में देख सकते हैं… किसी को बुरा लगे या भला, यह होकर रहेगा…

  7. थोड़ा दुःख तो मुझे भी हुआ था

  8. SHUAIB says:

    SAB KE SAB EK JAISE HAIN
    AGAR MAIN BHI WAHAN HOTA TO……….

  9. sameer lal says:

    यह सब सोची समझी रणनीति के तहत हुआ. उन्होंने न तो परमाणु समझौते पर कुछ कह और न विदेश नीति पर. बस, महज औपचारिकता पूरी कर दी.

  10. ऐसे में अटल जी बड़े याद आते हैं।

  11. जीतू जी, आप भूल रहे हैं कि संसद में ऐसे भी कई सांसद थे जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी, ये सांसद हिंदी भाषी प्रदेशों के ही नहीं, देश के अधिकांश राज्यों के सांसदों के लिए भी सच है।

    यह बात और है कि पूज्य विपक्षी नेता के पास कहने को कुछ था नहीं, क्योंकि परमाणु संधि के मामले में वह और कंग्रेस एक-राय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *