मोढ़ेरा का सूर्य मन्दिर

सोमनाथ के बाद मोढ़ेरा स्थिति सूर्य मन्दिर देख आने की प्रबल इच्छा थी. अहमदाबाद से ज्यादा दूरी भी नहीं है तो मौका मिलते ही परिवार के साथ सुबह सवेरे निकल पड़े.
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पुष्पावति नदी के किनारे स्थित इस सूर्य मन्दिर का निर्माण सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने 986 वर्ष पूर्व करवाया था.

मोढ़ेरा का सूर्य मन्दिर अब पुरातत्व विभाग की देख-रेख में आता है और हाल में यहाँ पर्यटन स्थलों के रखरखाव में काफी सुधार हुआ है तो मन्दिर के आस-पास बगीचा बना हुआ है और साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखा गया है. चूंकि यहाँ पूजा अर्चना नहीं होती तो श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं होती.

प्रवेश

(मन्दिर तक जाने के लिए पक्की पगदंडी है और दोनो ओर बगीचा है)


मुख्य द्वार से पक्की पगदंडी पर दोनो ओर बने सुन्दर बगीचों से गुजरते हुए सुनहरे-से बालुआ-पत्थर से निर्मित मन्दिर प्रागंण तक जाया जाता है.
सूर्यकुंड

(सूर्यकुंड)


मन्दिर के मुख्य तीन हिस्से है. इसमें सबसे आगे स्थित है सूर्य-कुंड जिसे राम-कुंड भी कहा जाता है. ज्योमितिय संरचना वाले इस कुंड के घेरे में 108 देवताओं के छोटे बड़े मन्दिर भी है.
(वास्तु के हिसाब से दिशा तय कर मन्दिर में प्रवेश के लिए तोरण बनवाया गया था, अब केवल अवशेष बचे हैं)

(वास्तु के हिसाब से दिशा तय कर मन्दिर में प्रवेश के लिए तोरण बनवाया गया था)


कुंड के बाद दांई ओर मन्दिर में प्रवेश करने के लिए तोरण बना हुआ था, जिसके अब दोनो खम्भे ही अब बचे है, अल्लाउउद्दीन खिलजी ने मन्दिर को खंडित करते समय तोरण को तोड़ दिया था.
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यहाँ से गुजरते हुए सभा मंडप में प्रवेश किया जाता है. यह वर्ष के 52 सप्ताह को ध्यान में रखते हुए 52 स्तम्भों से बना हुआ है. स्तम्भों पर पौराणिक कथाएं उकेरी गई है.

इसके बाद है मुख्य मन्दिर. अब यहाँ पूजा-अर्चना नहीं होती क्योंकि मन्दिर खिल्लजी द्वारा खंडित कर दिया गया था, साथ ही भगवान सूर्य की स्वर्ण प्रतिमा तथा गर्भ-गृह के खजाने को भी इस मुस्लिम शासक ने लूट लिया था. कमल का फूल भगवान सूर्य का फूल माना जाता है. इसलिए पूरा मंडप औंधे कमल के आकार के आधार पर निर्मित किया गया है. मुख्य मंडप पत्थर के स्तम्भों को अष्टकोणीय योजना से खड़े कर निर्मित किया गया है. चारों दिशाओं से प्रवेश के लिए अलंकृत तोरण बने हुए है. मंडप के बाहरी ओर चारों और 12 आदित्यों, दिक्पालों, देवियों और अप्सराओं की मूर्तियां प्रतिष्ठित है.

(मन्दिर के बाहरी ओर चारो तरफ दिशाओं के हिसाब से उनके देवताओं की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित की गई है. इसमें सूर्य देवता की इस प्रतिमां को घुटनो तक के जुते पहने हुए देखा जा सकता. सामान्य रूप से कोई देवता पादुकाएं पहने नहीं दिखते)

(मन्दिर के बाहरी ओर चारो तरफ दिशाओं के हिसाब से उनके देवताओं की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित की गई है. इसमें सूर्य देवता की इस प्रतिमां को घुटनो तक के जुते पहने हुए देखा जा सकता. सामान्य रूप से कोई देवता पादुकाएं पहने नहीं दिखते)

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5 Responses to “मोढ़ेरा का सूर्य मन्दिर”

  1. Hardip Patel says:

    મને ઇતિહાસ વિશે ખબર ન હતી. બહુ મસ્ત પોસ્ટ છે ભાઈ. ખુબ ખુબ આભાર તમારો.

  2. सूर्यकुण्ड स्थापत्य और जल संग्रहण का अद्भुत संमिश्रण है।

  3. ePandit says:

    वाह सुन्दर मन्दिर। यहाँ पूजा दोबारा शुरु की जानी चाहिये, सूर्यदेव के कुछ ही मन्दिर होंगे भारत में। खिलजी जैसे बर्बरों की जितनी आलोचना की जाय कम है जो ऐसे श्रेष्ठ कला के नमूने तक को नहीं बख्शा।

  4. इतनी सुंदर कलाकृतियां देख कर अपने पूर्वजों से ईर्ष्या होती है 3:)

  5. खंडहर बता रहे हैं कि इमारत बुलंद थी..

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