रोमन से बहुत पहले देवनागरी में हुआ था प्रयोग

युवाओं पर लानते भेजते हुए आलसी निक्खटू वग़ैरा कह लेते है. लिखने का आलस देखो अंग्रेजी का स्वरूप बिगाड़ कर रख दिया है. संक्षिप्त संदेश यानी एसएमएस की भाषा तो ऐसी है कि हर कोई समझ ही न सके. r u rdy lol टाइप.

modi-sanjayयह तो हुई आज-कल की बात, इधर मेरा ध्यान पाँच-सात दशक पीछे तक जाता है. मेरी जानकारी के अनुसार तब भी देवनागरी का एक ऐसा ही संक्षिप्त स्वरूप प्रयोग में लिया जाता था. यानी रोमन से पहले देवनागरी की मात्राएं तोड़ी-फोड़ी गई थी.

यह लिपि वेपारी वर्ग द्वारा प्रयोग में ली जाती थी, जिसे “मोडिया” (या मुड़िया, मोडि) लिपि कहा जाता था. बिना मात्राओं वाली संक्षिप्त सी देवनागरी समझ लो. हर कोई पढ़ ही न पाए या फिर पढ़े तो गलत पढ़े.

इस लिपि का उपयोग तेजी से लिखने, गुप्त हिसाब किताब लिखने या फिर गुप्त संदेश- व्यवहार के लिए होता था.

इस बार राजस्थान जाना हुआ तब मुड़िया पर जानकारी नेट पर डालने के लिए सामग्री जुटाने की कोशिश की मगर हाथ कुछ नहीं लगा. लगता है इसकी जानकारी रखने वाली पीढ़ी भी अब हमारे बीच नहीं है.

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किसी साथी के पास इस लिपि सम्बन्धी जानकारी हो तो सांझा करें ताकि भावी पीढ़ी के लिए इस सम्बन्धी जानकारी सुरक्षित की जा सके.

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साथियों द्वारा विभिन्न स्रोतों के बारे में जानकारी भेजी गई है, यह कड़ियाँ निम्न हैं:

मोडि लिपि को समर्पित साइट

चिट्ठाकार समूह पर मुडिया पर चर्चा

मराठी विकि पर लेख

अंग्रेजी विकि पर लेख

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15 Responses to “रोमन से बहुत पहले देवनागरी में हुआ था प्रयोग”

  1. संजय भाई इस लिपि को लिखने व समझने वाले बहुत कम लोग रह गए है | ये लीपी पढ़ने वाले ही नहीं बल्की महाजनी भाषा पढने वाले भी बहुत कम है |

  2. इस लिपी को मुड़िया लिपी कहते हैं। इस पर अपने जीतू भाई और हरिराम जी ने कुछ काम किया था। मैने जब मुड़िया लिपी लिख कर सर्च किया तो कुछ लिंक्स मिले।
    मुड़िया लिपी

  3. @सागर नाहर, धन्यवाद जानकारी के लिए, मैने मुडिया का अपभ्रंश मोडिया सुन रखा था, इसलिए नेट पर भी सामग्री नहीं ढ़ूंढ़ पाया.

  4. वाह बहुत सुंदर बात बताई आप ने, इस भाषा के बारे पहले भी सुना तो था, लेकिन देखा या पढा कभी नही. धन्यवाद

  5. प्रवीण पाण्डेय says:

    मात्राओं का मोल समझना होगा नहीं तो बड़ा घालमेल हो जायेगा।

  6. SHUAIB says:

    वो जो सागर भाई ने लिंक दिया
    सबसे पहले आपकी इसी पोस्ट का लिंक दिखा रहा है गूगल 😮
    वाह भई, पोस्ट लिखी ही थी कि टॉप पर पहुंच गए।

    वैसे ये लिपि मेरे लिए नई जानकारी है।

  7. Arvind Nahar says:

    संजयजी आप की बात सही है … मेरे पिताजी को ये पढाना आता है , और बहुत से लोग आपने पुराने पत्र आदि पढ़ वाने के लिये आते है … अब मोडिया पढाने वाले लोग बहुत कम बचे है

  8. Anand G.Sharma says:

    मुड़िया लिपि के बारे में एक प्रहसन (जोक) सुना था |
    जोक है कि एक सेठ जी के मुनीम ने सेठ जी के घर पर एक मुड़िया लिपि में पत्र लिखा ” सेठ जी अजमेर गए – छोटी बही भेज दो” |
    उसे पढ़ा गया – “सेठ जी आज मर गए – छोटी बहू भेज दो” |
    वास्तव में जो लोग पढना नहीं जानते थे – यह उनके मुड़िया लिपि के अज्ञान को दर्शाता है |

  9. ePandit says:

    इस बारे में चिट्ठाकार समूह पर यह चर्चा देखें।
    https://groups.google.com/group/chithakar/browse_thread/thread/98626ef68714e81f/४९७२०७फ़७१८३०६बक

    वैसे रुचिकर लग रही है यह लिपि। काश इस बारे में कुछ जानकारी मिलती।

  10. मेरे लिए तो यह नयी जानकारी है…

  11. वाक्‍य में ‘अजमेर’ को ‘आज मर’, ‘रुई ली’ को ‘रोई ली’ और ‘बड़ी बही’ को ‘बड़ी बहू’ पढ़ने की बात बताई जाती है. तात्‍पर्य अजमेर शहर जाना, बही-खाता भेजना और रुई लेना-खरीदना का समाचार सेठ जी के मरने, रो लेने और बड़ी बहू को भेजने का बन जाता है. यह भी कहा जाता है कि यह गड़बड़ मात्रा न लगाने या कम लगाने के कारण होती थी, अगर रोमन के उदाहरण से अनुमान लगाएं तो ए, ई, आई, ओ, यू का इस्‍तेमाल किए बिना लेखन. वैसे इस पर काफी कुछ लिखा जा चुका है.

  12. Brijmohanshrivastava says:

    सर इस लिपि के सम्बंध में जानकारी नहीं है

  13. काजल कुमार says:

    इस तरह के प्रयोग हमेशा से ही होते आए हैं. अगर आप ध्यान दें तो आजकल कई जूते वाले, आंगड़िये व गहने बेचने वाले भी कुछ इसी तरह की तोड़-मरोड़ कर बनाई गई भाषाओं का प्रयोग करते हैं. इनका कोई निश्चित व लंबा लिखित इतिहास नहीं ही होता है

  14. @सागर नाहर – मैं मुडिया लिपी का विशेषज्ञ हूँ और इस पर संशोधन कर रहा हूँ । क्या आप कृपया बता सकतें हैं कि जीतू भाई और हरिराम जी ने इस पर क्या काम किया है ?

    फेसबूकपर मुडिया लिपी के लिए एक समर्पित समूह है – https://www.facebook.com/groups/123786634305930/

  15. आज 19/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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