लाख दुखों की एक दवा….

ऊँची मुंडेर पर बैठी महारानी साहिबा और उनके द्वारा नियुक्त जनता के प्रधानमंत्री से जनता गुहार लगा रही है. परेशान जनता का मनोरंजन राजकुमार ना ना प्रकार की नौटंकियों से करने की कोशिश कर रहा है. मगर जनता अपनी ही हाँके जा रही है.

हुजूर माई बाप, महँगाई बहुत बढ़ गई है.
खाने को दाना नहीं, अनाज सड़ रहा है.
आपके मंत्री रोज नए भ्रष्टाचार के रिकार्ड स्थापित कर रहे है.
आतंकियों को सजा नहीं हो रही.
देशद्रोही खुले आम देश की अखंडता को ललकार रहे है.
पड़ोसी देश परेशान कर रहे है.
लाल आतंक खून पी रहा है.
अंतहीन सूची….
आपके पास कोई जवाब है?

महारानी ने प्रधानमंत्री की ओर देखा. जनता नाराज है. पूछा, राजकुमार का राजतिलक कैसे होगा? है कोई हल, कोई जवाब?

प्रधानमंत्री ने आदतवश मूंडी हिलाई. है ना हल, है ना जवाब.

हिन्दू आतंकवाद!!!

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13 Responses to “लाख दुखों की एक दवा….”

  1. हंसराज 'सुज्ञ' says:

    सार्थक कटाक्ष!!

    सराहनीय!!

  2. ajit gupta says:

    एकदम सटीक। संक्षिप्‍त पर असरदार।

  3. आप से सहमत हे जी, आज ही एक खबर पढी वी वी सी पर ओर दिल नफ़रत से भर गया, धन्यवाद इस सच के लिये

  4. प्रवीण पाण्डेय says:

    देश मेरा खुशहाल बने,
    उन्नत माँ का भाल बने।

  5. राजकुँवरजी ने बोला है तो ग़लत कैसे हो सकता है।

  6. वैसे भगवा आतंकवाद भी कहते हैं जी।

  7. प्रधानमंत्री आज कल भागड़ा मे व्‍यस्‍त है

  8. Rakesh Singh says:

    एकदम धारदार ! कांग्रेस इसी दवा के दम पर अलगा चुनाव पार भी लगा सकती है |

    वैसे कई लोग राजकुमार जी को गद्दी पे बैठे देखने के लिए मरे जा रहे हैं ..

  9. ePandit says:

    प्रधानमन्त्री ने अपने प्यादों को हुक्म दिया जाओ जाकर हिन्दू/संघ कार्यकर्ताओं को ढूँढ-ढूँढ कर साबित करो कि वे आतंकवाद से जुड़े हैं। सीबीआइ/आइबी वगैरा को घोटालों की जाँच से हटाकर इसी काम पर बैठा दो, कभी तो साबित होगा कि हिन्दू आतंकवाद नाम की चीज है।

  10. इस दवा का इस्तेमाल आजकल राजस्थान की सरकार ज्यादा कर रही है |

  11. जनता पागल है…उम्मीदें लगाती ही क्यों है !

  12. sachha sacchha tikhaa tikhaa tir chalaaya hai
    Thanx

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