सन 46 वाली खादी की दुकान

“खादी वस्त्र विचार पूर्ण है” हिन्दी में लिखे इस वाक्य को पढ़ कर मैं उस दुकान के आगे रूकता हूँ. यह सिलचर की ‘खादी भंडार’ के नाम से एक खादी की दुकान है.

मैं दुकान के मालिक को नमस्ते कहता हूँ. ये स्वदेश प्रियदास है. मैं इन्हें बताता हूँ कि मैं गुजरात से आया हूँ और यहाँ खादी की दुकान देख कर कुतुहलतावश रुक गया था. क्या आप इस दुकान के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?

गुजरात से आए जिज्ञासु को देख उन्हें खुशी होती है और वे बतातें है कि उनकी माँ अलोप्रदा गाँधीजी के साबरमति आश्रम में रहा करती थी. उनके पिताजी धिरेन्द्रनाथ दास स्वतंत्रता सेनानी थे. वे साबरमति आश्रम आया जाया करते थे. एक दिन गाँधीजी ने उनकी माँ का हाथ पिताजी के हाथ में रख दिया. यानी उनके माता-पिता की शादी गाँधीजी ने करवायी थी.

उनके दादाजी रखलचन्द्र डे भी स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्हें कालापानी की सजा हुई, मगर वे अपने साथियों के साथ जेल से भागने में सफल रहे थे. उनका पैतृकगाँव चटगांव था. बाद में कोलकाता आ बसे. आजादी के बाद वे पेंशन पाते थे मगर बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तावित जमीन लेने से इंकार कर दिया था. उन्होने धूपगुड़ी में विद्याश्रम की स्थापना भी की थी.

धिरेन्द्रनाथ दास सिलचर आ कर खादी के प्रचार प्रसार का काम देखने लगे. 1946 में खादी बेचने के लिए दुकान खोली जो अब भी उनके बेटे स्वदेश प्रियदास द्वारा संचालित है.

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

4 Responses to “सन 46 वाली खादी की दुकान”

  1. भारत भर में इस प्रकार की अनगि‍नत अनकही गाथाएं मि‍लती हैं जि‍नके बारे में कोई नहीं जानता. धन्‍यवाद.

  2. गांधी के सच्चे सेवक..

  3. प्रभावी लेखन,
    जारी रहें,
    बधाई !!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *