समझ लो कि जुमले तो देसी होने चाहिए

चुनाव प्रचार में जुमलों का बहुत महत्व होता है. असली खिलाड़ी ही जुमले है. जो नारा चल गया तो समझो अपना प्रचार परवान चढ़ गया. बिलकुल फिल्म के हीट गीत वाली कहानी है.

जुमले का देशीपन हाथो हाथ जबान पर चढ़ता है. जब मोदीजी ने ‘वोट फॉर इंडिया‘ का नारा दिया था, मैंने कहा था यह नहीं चलने वाला. हमारा देश अमेरीका नहीं है. ‘चाय पे चर्चा‘ देशीपन लिये है, मगर थोड़ा कम. ‘हर हर मोदी, घर घर मोदी‘, इसका हीट होना तय था. वैसे ही ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ मस्त है और ‘जनता माफ नहीं करेगी’ यह तो आम बोलचाल का सा जुमला है. ऐसे में ये सारे चल निकले.

समझ लो जुमले देसी होने चाहिए.

हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की‘. इसमें तुकबंदी जरूर है मगर पर्याप्त देसी खुरदुरापन नहीं है इसमें. बस कहने के लिए कह दिया लगता है. कांग्रेस की ओर से कुछ और आने चाहिए. इससे तो पुराना वाला ‘कांग़्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ’ ज्यादा सही था. आम आदमी तो ऐसा हीट रहा कि एक पार्टी ही इस नाम से बन गई.

और इस पार्टी यानी आआपा का नारा, ‘बाहर निकलो दुकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से‘. इसमें तुकबन्दी है, मगर कविता लिखने वाले बता सकते है कि मात्राओं की जो गिनती है वह बराबर नहीं होगी, बोलने में थोड़ा अटपटा सा है. और जंग जैसे शब्द भी इसमें गड़बड़ है. मुझ से पुछा जाता ( 🙂 ) तो मैं जुमला देता ”आम आदमी की अपनी सरकार’.

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2 Responses to “समझ लो कि जुमले तो देसी होने चाहिए”

  1. नारों से जमता जनता पर प्रभाव।

  2. आम का बना अचार

    अब लाओ मोदी सरकार!

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