सम्राट की टूच्ची बात

अरे रे रे रे सम्राट यह क्या कह दिया आपने? आप कहेंगे यह सम्राट कौन है जिसने ओछी बात कह दी. तो पहले यह देखना जरूरी है की सम्राट कौन होता है. गली मोहल्ले का दादा सम्राट नहीं हो सकता. न ही ठाकुर वगेरे सम्राट होते है. राजा-रजवाड़े भी सम्राट नहीं होते. सम्राट होना जरा बड़ी चीज है. टूच्ची सोच वाला सम्राट नहीं हो सकता और न ही सम्राट की सोच टूच्ची हो सकती है.

अब आते है सम्राट पर तो ये है कथित हिन्दू हृदय सम्राट श्री बाला साहब ठाकरे जी. इस सम्राट का प्रभाव क्षेत्र इनका निवास है या मुम्बई है या महाराष्ट्र तक सीमित है, यह कहना मुश्किल है. मगर यह तय है की यह सम्राट ज्यादातर क्षेत्रीय मानसिकता के साथ जी रहा है. मराठी अस्मिता तक ही इनकी सोच सीमित रही है, फिर बिहार के हिन्दुओ के हृदय के सम्राट कैसे हो सकते है? मगर मुगालते में रहने से किसी को रोका तो नहीं जा सकता.

कभी भारत के किसी भी कोने में कवि सम्मेलन हो, वीररस का कवि “ठाकरे” के नाम पर खूब तालियाँ बटोरा करते थे.  इनकी एक धमकी का असर घाटी के आतंकियो पर होते देखा है. मगर जल्दी ही यह आभा मण्डल “सम्राट” ने खो दिया. क्षेत्रीयता के बात करने वाला व्यापक समर्थन कैसे पा सकता है?

अब ऐसी ही एक और टूच्ची बात “सम्राट” ने कह दी. हिन्दुओं को आत्मघाती दस्ते बनाने की सलाह दे डाली. एक बात बताएं सम्राट की जिन्होनें ऐसे दस्ते बनाये है क्या वे अपने धर्म और खूद का रक्षण कर पाये है, जो हिन्दू कर सकेगें? ऐसे काम कायरों को शोभा देते है, ठाकरेजी. हिन्दुओं को कायरता का पाठ न पढ़ाएं. जरूरत है सभ्य समाज की तरह आतंकवाद से लड़ने की. उसके लिए कोई सुझाव हो तो दें वरना हिन्दुओ के दामन पर आंतकी होने का दाग क्यों लगवाना चाहते है?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

8 Responses to “सम्राट की टूच्ची बात”

  1. ऐसे काम कायरों को शोभा देते है: बिल्कुल सही कह रहे हैं, संजय बाबू.

  2. अरूण says:

    काहे पंगा ले रहे हो संजय बाबू ?

  3. अगले चुनाव के परिणाम देखेंगे। कितना आभामण्डल है – स्पष्ट होगा।

  4. न तो वे सम्राट हैं और न ही टुच्ची बात, ये तो जिन्दा रहने की मशक्कत है।

  5. G Vishwanath says:

    पूरी तरह सहमत।
    आतंकवादियों से लड़ना है हमें, उनका अनुकरण नहीं करना है।
    =======
    आज पहली बार आप के ब्लॉग स्थल पर आया हूँ।
    आता रहूँगा।
    शुभकामनाएं
    गोपालकृष्ण विश्वनाथ

  6. उन्होंने कहा है कि एडिटोरियल में मिसप्रिंटिंग की वजह से ग़लत-सलत छप गया.

    कह रहे थे; “मैंने तो आत्मघाती दस्त की बात कही थी, मिस प्रिंटिंग की वजह से आत्मघाती दस्ता छप गया.”

  7. सही बात करी आपने.वैसे मैं अरुण जी से भी सहमत हूँ कि काहे को पंगा लेते हैं आप बहुत बड़े लोग हैं कमबख्त कहीं नंगा कर पीटने न लगें,हा हा हा हा …
    आलोक सिंह “साहिल”

  8. Ghost Buster says:

    ठाकरे जी ने कोई पहली बार ये बात नहीं की है. पिछली बार भी उनकी इस बात का विरोध हुआ था. वैसे पूरा सन्दर्भ जाने बिना ज्यादा कुछ नहीं कह सकते.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *