सर्प जाति का निजी जीवन

यह तस�?वीर प�?रकृतिप�?रेमीयों के लि�? किसी उपहार से कम नहीं होगी. वजह सरल सी हैं, सर�?प अपनी निजी जिंदगी कभी सार�?वजनिक नहीं करते. नर-मादा का समागम भाग�?य वश ही कभी देखने में आता हैं. लेकिन �?क जोड़ा जब रतिक�?रिडा में व�?यस�?त था, कैमरे में कैद कर लिया गया. बाद में यह तस�?वीर विवरण के साथ �?क दैनिक समाचार पत�?र में प�?रकाशित ह�?ई. sarp yugal
तमाम किवंतीयो से परे सर�?प जाति के निजी जीवन की क�?छ बेहद रोचक बाते यहां लिख रहा हूं.
सर�?प जाति की �?क ख़ासियत यह हैं कि ये अपनी जाति के प�?रति बेहद वफादार होते हैं. कहना न होगा कि इनकी सभी ५००० जातियों के नर-मादा सांपो को �?क साथ �?क कमरे में कैद कर दे तो भी हरेक सिर�?फ अपनी जाति वाले सांप के साथ ही संवनन करेगा, किसी अन�?य जाति के साथ संताने पैदा नहीं करेगा. यह तो ह�?ई ज़बरदस�?त वफ़ादारी की बात, अब इनकी बेवफ़ाई भी जान ले. सर�?प जाति में परिवार के प�?रति कोई प�?रेम नहीं होता. रतिक�?रिङा के बाद नर व मादा किसी अजनबी की तरह अपने अपने रस�?ते चल देते हैं और तो और अण�?डे देने के बाद मादा भी उनकी देखभाल करने कि जहमत नहीं उठाती. समय के साथ बच�?चे अण�?डो से स�?वयं बाहर आते हैं और अपने लि�? भोजन खोजने लगते हैं.
अपने नाम से ही भयभीत कर देने वाला सांप सचम�?च में कितना विकलांग हैं, इसके न तो कान होते हैं, न ही पैर होते हैं. दृष�?टि भी लघ�? होती हैं. इन सभी कमियों के बाद भी सर�?प सें मन�?ष�?य �?क सीख ले सकता हैं, वह है ‘फोरप�?ले’ की. मैं लिखने में भूल नहीं कर रहा हूं यह सत�?य हैं. हमारे कामशास�?त�?री बेचारे इसके महत�?व को लेकर कभी कोलम लिखते हैं तो कभी प�?स�?तके प�?रकाशीत करते हैं, जबकि सर�?प जाति इस मामले में हमसे कहीं आगे नजर आती हैं.
प�?रजनन काल में नर तथा मादा की देह से �?क गंध नीकलती हैं जिसे वे अपनी जीभ सें परखते हैं. गंध से आकर�?षित नर मादा के नज़दीक आता हैं और उसकि देह से अपनी देह को घीस कर उसकी जाति की पहचान करता हैं. अन�?य जाति की होने पर वहां से दूर हो जाता हैं और अपनी जाति की होने पर दोनो �?क दूसरे से ग�?ंथ जाते हैं. फिर आधे शरीर को हवा में उठा कर नृत�?य करते हैं, यह दृश�?य सचम�?च मोहक होता हैं. यहां खास बात यह भी हैं कि मादा रतिक�?रिङा में अन�?य प�?राणीयों की अपेक�?षा संय�?क�?तरूप से सक�?रिय रहती हैं. लम�?बे फोरप�?ले के बाद मैथ�?न पूरा होता हैं.
( यहां दो पंक�?तियो जितना विवरण अश�?लील लेखन न मान लिया जा�? इस डर से छोड़ दिया हैं.)

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