साड़ी पहनी तो दण्ड भरना होगा

परिधानों की पराधिनता

नाइजीरियाई महिलाएं: परिधानों की पराधिनता

साड़ी देह से लिपटा नौ गज का जादू है, साड़ी के बारे में यह मेरी निजी राय है. साड़ी शालीन भी है तो साड़ी सेक्सी भी है. भारतीय मानस, साड़ी को संस्कृति से जोड़ कर देखता है और विवाहित महिलाएं साड़ी ही पहने ऐसा बहुतायत में एक पीढ़ी पीछे की महिलाओं का दुराग्रह भी रहता है. वैसे महिलाओं को क्या पहनना है और क्या नहीं इसे वे खुद ही सुविधा व समय के अनुसार तय करे यही उचित है.

मगर हमारी संस्कारवान साड़ी शायद नाइजीरिया की सरकार को अश्लील लगती है, और अगर वहाँ प्रस्तावित कानून स्वीकृत हो गया तो साड़ी जैसे अश्लील (?!!!) पहनावे के लिए दण्ड भी भरना पड़ सकता है. ध्यान देने की बात है की नाइजीरिया मुस्लिम बहुल देश है जहाँ हिन्दू व ईसाई जैसे अल्पसंख्यक भी रहते है.

साड़ी पर प्रतिबन्ध लगाने के पीछे दिया जाने वाला तर्क यह है की ऐसे परिधानों में औरतों को देख कर पुरूषों की मति भ्रष्ट होती है और वे भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते है. इस प्रस्तावित कानून का विरोध भी हो रहा है, मगर इसका कितना असर होगा यह कहना मुश्किल है.

नाइजीरियाई महिलाएं साड़ी से ज्यादा खुले वस्त्र धारण करती रही है, मगर लगता है धर्म का जूनुन बढ़ा तो महिलाओं को भविष्य में बुर्के में कैद होने को तैयार रहना चाहिए…

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10 Responses to “साड़ी पहनी तो दण्ड भरना होगा”

  1. संजय भाई। यही तो रोना है जो हमारी नजर में सभ्य है वही दूसरों की नजर में असभ्य। पता नहीं, वे सही हैं या मैं।

    पर यह तर्क तो मेरे गले के नीचे कभी नहीं उतर सकता–
    साड़ी पर प्रतिबन्ध लगाने के पीछे दिया जाने वाला तर्क यह है की ऐसे परिधानों में औरतों को देख कर पुरूषों की मति भ्रष्ट होती है और वे भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते है.

    ये तर्क वे किसी शोध के आधार पर दे रहे हैं क्या??????? :mrgreen:

  2. maithily says:

    साड़ी विश्व का सर्वाधिक आकर्षक परिधान है (मेरी व्यक्तिगत राय है).
    लेकिन ये महिलाओं को ही चुनना है कि वो क्या पहिनें.
    साड़ी के ऊपर जो इस तरह के प्रतिबन्ध लगा रहे हैं वो महामूर्ख हैं.

  3. सही बात है। साड़ी में महिलाएं जितनी शालीन व आकर्षक लगती हैं, किसी अन्‍य पहनावे में नहीं। मैथिली जी ठीक कहते हैं, साड़ी पर प्रतिबंध लगानेवाले महामूर्ख हैं।

  4. Priyankar says:

    साड़ी सम्भवतः दुनिया का सबसे श्लील और आकर्षक परिधान है . हर तरह की काया सलीके से पहनी साड़ी में सुरुचिपूर्ण और सुघड़ लग सकती है . जबकि अन्य परिधान अच्छे और उपयोगी होने के बावजूद उम्र विशेष और शरीर के गठन और वजन के अनुसार ही आकर्षक और अनाकर्षक लगते हैं . शलवार-कमीज को मैं दूसरे स्थान पर रखता हूं . बाकी तो हर महिला अपनी रुचि,समाज और देशकाल के अनुसार कुछ भी पहनने को स्वतंत्र है .

    पर साड़ी पर अश्लीलता का आरोप कुछ गले नहीं उतरता . कट्टरता,मूढ़ता और उत्पीड़न का मिलाजुला-सा मामला दिखता है .

  5. हम आपकी बात से सहमत हैं कि साड़ी खासी सेक्‍सी पोशाक है पर उसे अश्‍लील कहना ठीक नहीं लगता। यह सही है कि सांस्‍कृतिक मूल्‍य देश काल के सापेक्ष होते हैं पर कोई क्‍या पहने ये तय करना सरकारों का काम नहीं है।

    इसे महज मूढ़ता मानना भी ठीक नहीं, ये बाकायदा तालीबानीकरण है।

  6. साड़ी अब विशुद्ध भारतीय है, लेकिन कभी का आयातित वस्त्र। विशुद्ध भारतीय वस्त्र तो लहंगा, चोली और ओढ़नी हैं। परिवर्तन वस्त्रों में सतत होता आया है और होता रहेगा। लेकिन किसी को भी किसी खास तरह के वस्त्र पहनने या न पहनने को पाबंद करना उचित नहीं है। हाँ समाज में प्रचलित व्यवहार के अनुसार शालीन वस्त्र पहनने को पाबंद करना उचित है। हो सकता है साड़ी में खुद को छुपा कर कुछ अवैध, अनैतिक काम करने की कोशिश की गई हो और उस से यह बात उपजी हो। जिस तरीके से लड़कियाँ वाहनों पर खुद को ढक कर निकलने का चलन बढ़ा है उस से गलत काम करने वाले और अपराधी इस वेश का लाभ उठाने लगें तो हो सकता हैं यहाँ भी उस वेश पर पाबंदी आयद करने की बात उठे। आप ने पूरा परिप्रेक्ष्य नहीं रखा। रखें तो उस पर विचार भी किया जाए।

  7. इस तरह के प्रतिबन्धों को मूर्खता की श्रेणी में रखना ज्यादा उचित है.

  8. दिनेशजी बात यहाँ भारतीय या अभारतीय की नहीं है, बात शालिन और अश्लील की है तथा परिधानों को थोपने की है.
    वैसे इस पर प्रकाश डालें की साड़ी कहाँ से आयातीत है.

    साड़ी की आड़ में गलत काम नहीं हुआ है, मैने लिखा भी है की साड़ी में अश्लीलता दिखती है. फिर बात साड़ी की ही नहीं नाइजीरिया के परम्परागत वस्त्रों को लेकर भी है. वहाँ महिलाओं को बुर्के में कैद किया जा रहा है.

  9. आप बात करें खेत की और मैं करूँ खलिहान की, यही तो बुद्धिजीवी होने की निशानी है 🙁

  10. Amit says:

    भई क्या सेक्सी है और क्या अन-सेक्सी, क्या श्लील है और क्या अश्लील, क्या सभ्य है और क्या असभ्य, ये सब विचार व्यक्तिगत सोच पर निर्भर करते हैं। सभी सबजेक्टिव हैं, कोई आवश्यक नहीं कि एक का जो विचार हो वह दूसरे का भी हो। इसलिए किसी पर अपने विचार ऐसे नहीं थोपने चाहिए। यदि साड़ी अश्लील है तो श्लील की परिभाषा बतानी चाहिए उनको। क्या देह प्रदर्शन करने वाली पोशाकें श्लील मानी जाती हैं? छोटी स्कर्ट, तंग और महंगाई की मार के कारण कम कपड़े की के बने टॉप श्लील हैं? क्या वे वैध हैं या उन पर भी बैन लगाया है?

    वैसे यहाँ मॉडर्न होने का दम भरने वाले दिखावटियों को साड़ी एक वाहियात परिधान लगती थी जो कि बाबा आदम के ज़माने के लिए ही ठीक थी। लेकिन शाहरुख की फिल्म “मैं हूँ ना” में सुष्मिता सेन ने इन लोगों की सोच बदल दी, उनको भी साड़ी मनमोहक और सेक्सी लगने लगी(ध्यान रहे मसिजीवी जी की ओर इशारा नहीं हैं अपना)!! 😉

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