हार भी नेता की पहचान कराती है

राहुल ने मुझे निराश किया. यह कोई व्यंग्य नहीं है न ही मैं उत्तर-प्रदेश के चुनाव परिणाम के लिए ऐसा कह रहा हूँ. राहुल जिस विचारधारा से आते है अपना उससे विरोध है, उनसे कोई व्यक्तिगत बैर नहीं है.

rahul-gandhiकल जब राहुल उर्फ सत्तापक्ष के राजकुमार एक प्रांत में पार्टी की हार की जिम्मेदारी ले रहे थे, किसी भी दृष्टी से नेता नहीं लग रहे थे. लोकतंत्र में चुनाव आते रहते है, जीत हार में और हार जीत में बदलती रहती है. मगर इस तरह हार से टूटा हुआ इंसान कभी देश का नैतृत्व करेगा, सोच भी नहीं सकते.

उनके व्यक्तिगत मामले कई हो सकते है मगर जो सार्वजनिक दिखा वह यह कि उन्हें हार की जिम्मेदारी स्वीकारने के लिए कैमरों का सामना करते हुए बहन के सहारे की जरूरत पड़ रही है. ऐसा व्यक्ति प्रधानमंत्री बन गया तो भिषण परिस्थियों में देश का नैतृत्व कैसे करेगा?

जीत ही नहीं हार भी नेता की पहचान कराती है. क्षमा करना राहुल, आप जीत तो क्या सम्मानजनक हार के नेता भी नहीं बन सकते.

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4 Responses to “हार भी नेता की पहचान कराती है”

  1. प्रवीण पाण्डेय says:

    स्वप्न देखे जायें
    न दैन्यं न पलायनम्

  2. यह देश का दुर्भाग्य है कि हमारे देश का भाग्य ऐसे कमजोर नेताओं के सहारे टिका है !!

  3. Ranjana says:

    सही …बिलकुल सही…

    बात यह है की बनौआ नेता सच्ची के नेता थोड़े न बन सकते हैं…

  4. વિરલ says:

    ये पूरे के पूरे स्क्रीप्टेड है!

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