अब नौटंकी का नहीं व्यवहार कुशल बनने का समय है

आआपा की जीत इसमें नहीं कि उसने 28 सीटों पर कब्जा किया, जीत इसमें है कि उसे पढ़े-लिखे व संपन्न ‘खास’ लोगो ने वोट दिया.

इसका महत्त्व इसलिए भी है कि आम-आदमी कहे जाने वाले को सस्ती बिजली व मुफ्त पानी तो समझ आता है मगर नक्सली सहयोगी, अलगावादियों द्वारा आआपा को मिल रही बधाई या पाकिस्तान व अन्य विदेशी स्रोतों से चँदा आना जैसी बातों के अर्थ ‘खास’ आदमी ही समझ सकता है. फिर भी उसके वोट मिले. यह चिंतन का विषय जरूर है.

आज आआपा दिल्ली की जनता की दुसरी पसन्द है. और जनता का निर्णय ही अंतिम होता है. इसका स्वागत किया जाता है. यह लोकतंत्र का संस्कार है. विरोध विचारधारा का होता है, जनता के निर्णय का नहीं. यही वजह है कि राजस्थान में बूरी तरह से पराजीत होने के बाद भी गेहलोत वसुंधरा के शपथ-ग्रहण समारोह में उपस्थित थे और बधाई भी दी. यह नहीं कहा कि राजस्थान की जनता ने मूर्खता की है.

यही तरीका है लोकतंत्र का जो आआपा के बड़बोले नेताओं को सीखना चाहिए. चुनाव से पहले श्री केजरीवाल ने ट्विट की थी कि मोदी का विरोध मत करो. और चुनाव के बाद श्री कुमार विश्वास ने कहा मोदी को चुन कर गुजरात की जनता ने मूर्खता की है. जनता ने मूर्खता की है? यह बात केवल एक मूर्ख ही कह सकता है, क्योंकि किसी समझदार की हिम्मत नहीं जो लोकतंत्र में जनता को मूर्ख कहे.

हम आआपा के आलोचक है अतः आलोचनाएं करेंगे और जम कर करेंगे, मगर दिल्ली की जनता पर ऊँगली उठाने का अधिकार हमें नहीं है. श्री केजरीवालजी, अब शीलाजी आपकी सहयोगी है. लिखने-बोलने के तौर-तरीके उनसे सीख सकते हैं. और अपनी खाँसी को लम्बा मत खिंचिये, पूरानी खाँसी अच्छी नहीं होती, आप पर दिल्ली की जिम्मेदारी है अतः परिक्षण करवा लें. विपक्ष के नेता भी पढ़े लिखे है, डोक्टर है, उनसे सलाह ले सकते है.

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3 Responses to “अब नौटंकी का नहीं व्यवहार कुशल बनने का समय है”

  1. HARSHVARDHAN says:

    आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन मोहम्मद रफ़ी साहब और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर …. आभार।।

  2. Neeraj Rohilla says:

    जितना जल्दी इस कुमार विशवास से आप दूर हो सकें उतना बेहतर.

  3. अब लड़ने नहीं, गढ़ने का समय है, रोचक भविष्य।

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