नाम बदलने से समस्या हल हो जाएगी?

आपको आश्चर्य होगा, अगर मैं कहूँ कि मेरा नगर पूर्णतः समस्या मुक्त है.
जैसे मेरे नगर में न गड्ढे है, न कचरे के ढेर है. यहाँ तक कि ट्राफिक की भी कोई समस्या नहीं है.

आप मुझे मुर्ख कह सकते है, लेकिन सच्चाई यही है. और इसके पीछे जो कारण है उसे बुद्धिजीवियों द्वारा खोज लिया गया है. अनुसंधान से साफ़ पता चला है कि “किसी नगर की समस्याओं का उसके नाम से सीधा सम्बन्ध है”.

ठीक है कि इस बात का पता हमें अब जाकर लगा है, लेकिन हमारे हमलावरों को इसकी जानकारी पहले से ही थी. मैं अपने नगर का उदाहरण देकर आपको समझाता हूँ.

कभी इस नगर का नाम कर्णावती हुआ करता था. उस समय इस नगर की अपनी समस्याएँ थी. यही कि जगह जगह गड्ढे थे. कचरे के ढेर थे. ट्राफिक तो उस जमाने में इतना नहीं था. लेकिन तब की कुछ अन्य समस्याएँ भी थी.

फिर नगर पर आक्रमण हुआ. लूटपाट हुई. मंदिर वगेरे तोड़े गए. लेकिन इससे नगर की समस्याएँ समाप्त नहीं हुई. तब आक्रमणकारी अहमद शाह को ध्यान आया कि उसे किस प्रकार नगर को समस्याओं से मुक्त करना है.

उसने नगर का नाम कर्णावती से बदल कर अहमद-आबाद कर दिया. इस फार्मूले ने काम किया और नगर की सभी समस्याएँ पलक झपकते ही समाप्त हो गई. जाहिर है, “किसी नगर की समस्याओं का उसके नाम से सीधा सम्बन्ध है”.

हो सकता है आपको यह सही नहीं लगे और आप मुझे मुर्ख कहें. आप कह सकते है कि नाम बदलने से समस्याओं के निवारण से क्या सम्बन्ध? मैं आपकी बात मान भी लूंगा, लेकिन प्रखर बुद्धि के स्वामी, अति-सेक्युलर नहीं मानेंगे. उनका दृढ मत है कि शहर के नाम का उसकी समस्याओं के निवारण से सीधा सम्बन्ध है. और वे सवाल करते हैं कि कर्णावती नाम करने से शहर कि समस्याएँ समाप्त हो जाएगी क्या? जब अहमदाबाद करने से समस्याएँ समाप्त हुई थी तो कर्णावती करने से भी होगी. क्यों नहीं होगी ? लेकिन इन सेक्युलरों को कौन समझाए?

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