नरम मुलायम पहले प्यार सी है हिन्दी ब्लोगरी की यादें

१ जुलाई को हिंदी ब्लोगिंग दिन घोषित किया जा रहा है और हिंदी ब्लोगिंग से चूँकि पुराना नाता रहा है, तो एक प्रविष्टि तो डालनी पड़ेगी ही है. वैसे ही जैसे ज़िंदा हो तो ज़िंदा दिखो भी. अगर हिंदी ब्लोगर हो तो चिटठा लिखो भी. ब्लोगरी से देर से जुड़ने वाले साथियों को बता दूँ, पहला चिट्ठा अनुनाद द्वारा ‘नौ दो ग्यारह’ लिखा गया था और शायद वह दिन १ जुलाई नहीं था. पहला ब्लॉग एग्रीगेटर देबाशीष ने बनाया था, वह दिन भी शायद १ जुलाई नहीं था. दूसरा समयानुकूल एग्रीगेटर ‘नारद’ था, और उसके बाद आया था ‘चिट्ठा जगत’.

खैर, लिखना यहीं से सीखा. गुजराती और हिन्दी भाषा में एक जैसे शब्दों की वर्तनियाँ भी अलग अलग है, तो प्रारम्भ में बहुत तकलीफ हुई. हिन्दी अशुद्ध लिखने का दुःख भी होता था. लेकिन ढ़िटता से लिखते रहे और लिखते लिखते लिखना सीख गए. मजे की बात यह है कि तब हिंदी लिखना इतना सरल नहीं था. उपकरण नहीं थे.

एक बार “दिल” को ‘दील’ लिख दिया था, और फुरसतिया अनूप शुक्लजी का दिल त्राहिमाम कर उठा था. परिणामतः उनकी कलम से एक चिट्ठा ‘दिल’ पर भी लिखा गया.

आरंभिक चिट्ठाकार अनुनाद, रवि रतलामी, अनूप शुक्ल, ई-स्वामी, देबाशीष, अमित, जितेन्द्र, सागर नाहर और उनके बाद आने वाले सुरेश चिपलूनकर, समीर लाल जैसे लोगों का आभार कि आपने मुझे लिखना सीखाया.

हिन्दी चिट्ठाकारिता अमर रहे.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

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One Response to “नरम मुलायम पहले प्यार सी है हिन्दी ब्लोगरी की यादें”

  1. sameer Lal says:

    अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉग दिवस पर आपका योगदान सराहनीय है. हम आपका अभिनन्दन करते हैं. हिन्दी ब्लॉग जगत आबाद रहे. अनंत शुभकामनायें. नियमित लिखें. साधुवाद..
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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