छद्म साइटों के सहारे फैलता झूठ

जब सोशल मीडिया पर कोई जानकारी शेयर करते हैं, तब सबसे पहले सबुत माँगा जाता है, अब जिन्हें प्रोपोगेंडा रचना है, झूठ फैलाना है तो वो क्या करेंगे, ज्यादा से ज्यादा फोटोशोप्ड फोटो शेयर करेंगे. लेकिन अब इससे काम नहीं बनता, विश्वनीय बनाने के लिए “लिंक” जोड़ना अनिवार्य है. लेकिन झूठ की लिंक कोई लाए भी तो कहाँ से?

इसी प्रकार लोगो में भ्रम फैलाना हो तब भी सोशल मीडिया उतना विश्वसनीय साधन नहीं है. तो क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे छद्म खेल रचा जा सके? झूठ को सच दिखाया जा सके और सोशल मीडिया में फैलाने पर वह विश्वसनीय भी लगे?

देखा जाय तो मुझे कुछ लिखने की जरूरत ही नहीं है, आप स्वयं नजर डालें, विशेषकर वर्तमान सरकार को भ्रष्टाचार या अन्य मुद्दों पर घेरना सम्भव नहीं है तब संघ को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है. इस तरह की झूठी बातों को लेकर जो लिंकें शेयर हो रही है उन साइटों के नाम व काम पर गौर करें. सब कुछ साफ हो जाएगा. मैं दक्षिणपंथ विरोधी स्थापित मीडिया हाऊसों की बात नहीं कर रहा, वे मुख्य धारा के अंग है. विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है. मैं उन साइटों कि बात कर रहा हूँ, जिनका कोई माई-बाप नहीं है. वे छद्म है, कानून और नियमों से परे हैं. अखबार निकालना हँसी खेल नहीं, ऊपर से कानून से आप परे नहीं हो सकते, लेकिन एक न्युज साइट खोलना आधे घंटे का काम है. फिर झूठ परोसना है और उसे शेयर करना है. पकड़े जाने पर झूठ का पुलिंदा उक्त लेख को हटा देना है. लेकिन शेयर हुआ झूठ तब भी फैल रहा है. ज्यादा तकलिफ हुई तो साइट ही बंद कर दी और दुसरी कोई ‘सच्ची खबर’ ’24 घंटे खबर ही खबर’ जैसे कुछ भी नाम से एक और साइट बना ली.

यह बात मैं बहुत बार कहता था कि ऐसा हो रहा है, लेकिन सबूत नहीं थे. आज सबूत हाथ लगे हैं. एक मित्र की वाल पर यह फोटो देखी:

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फिर स्रोत पर गया तो देखा 404. लेख हटा लिया गया था.

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खबरों का स्त्रोत, स्वतन्त्र ब्लॉगर 🙂

फिर साइट पर मालिक का नाम कार्यालय खोजा तो साइट से नदारद, लेकिन डूमेन किसका है यह देखने का रास्ता अभी शेष था, तो वहाँ यह मिलाः

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अब जब भी अनर्गल दिखे, गौर करें कि इसका किस साइट से रिश्ता है?

यह केवल उदहारण मात्र है.  सावधान रहें, कहीं आप विरोध करने की धून में राष्ट्रविरोधियों के हाथों में खेलते हुए उनके सहयोगी तो नहीं बन रहे? यह भी देखें कि खबर है या ब्लॉग है? कुछ शातिर लोग स्थापित साइटों पर ब्लॉग लिख उसे ऐसे शेयर करते है मानों यह उस साइट की खबर है. वास्तव में तो यह धोखा देने कि चाल होती है.

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