तैमुर नाम पर क्यों आहत है भारतीय ?

तमाम आफतों के बाद भी हमारा अस्तित्व बना रहा क्योंकि इतिहास को माफ कर देने की प्रवृति रही है हमारी, लेकिन जब घावों को कुरेदा जाएगा तो कराहटें भी निकलेगी. वाणी स्वतंत्रता की दुहाई देने से काम नहीं चलेगा. समझना होगा आखिर एक आम भारतीय “तैमुर” पर क्यों आहत है.

आम भारतीय के विचारों को समझने के लिए सोशल मीडिया से अच्छा क्या माध्यम हो सकता है?

आइये देखें एक भारतीय क्या लिख रहा है, क्या सोच रहा है? क्यों वह आहत है.

तैमूर लंग खुद को चंगेज खान का वंशज मानता था। जैसे चंगेज खान ने मंगोलिया से निकलकर आधे यूरेशिया पर कब्जा कर लिया था वैसे ही तैमूर लंगड़ा भी करना चाहता था। वह पूरी तरह सफल तो नहीं हो पाया लेकिन हत्याओं का उसने रिकार्ड कायम किया। इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि अपने सैन्य अभियानों में उसने पौने दो करोड़ लोगों का कत्ल किया। इसमें एक बड़ी तादात हिन्दुओं की थी क्योंकि वह कुरान का पाबंद था और मूर्तिपूजकों को मारना अपना ईमान समझता था। लेकिन तैमूर इतना क्रूर था कि बड़े स्तर पर उसने मुसलमानों को भी कत्ल करवाया।

आज सीरिया का जो अलप्पो शहर इस्लामिक आतंकवाद का शिकार बना है ऐसा ही दौर तैमूर के समय में भी आया था। अलेप्पो और दमस्कस पर हमला करके उसने मुसलमानों को नेस्तनाबूत कर दिया था। इसके बाद बगदाद पर हमला किया और अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बिना दो सिर लिए कोई सैनिक कैम्प में वापस नहीं लौटेगा। कहते हैं बीस हजार मुसलमान उस दिन बगदाद में कत्ल किये गये थे। जाहिर है, उसके सैन्य अभियान में जो आड़े आ जाता था वह उसे कत्ल कर देता था फिर चाहे वह हिन्दू रहा हो, मुसलमान या फिर कोई अन्य।

सवाल हिन्दू मुसलमान का नहीं है। सवाल है इतिहास बोध का। जिस समाज का इतिहासबोध इतने गर्त में गिर गया हो कि हत्यारों में नायकत्व खोजता हो उस समाज को माफ कर देना चाहिए। उसकी गलतियों के लिए नहीं। उसकी मूर्खताओं के लिए।
– संजय तिवारी 

#तैमूर #Taimur के शाब्दिक अर्थ समझाने और स्वतन्त्रता की दुहाई देने वालों ने अपने बेटे-बेटियों का नाम ताड़का, शूर्पनखा, मन्थरा, खर-दूषण, कंस आदि अब तक क्यों नहीं रखे ? इनके शाब्दिक अर्थ तो भले चंगे ही हैं।

और हाँ ,स्वतन्त्रता केवल आपकी-उनकी ही नहीं, हमारी भी मायने रखती है, हमारे पूर्वजों के हत्यारों को अपना नायक मानने वालों से घृणा न सही, व्यंग्य करने का अधिकार हमारा भी है ! अपनी स्वतन्त्रता की बीन कहीं और बजाइये।
-कविता वाचक्नवी

नाम में कुछ नहीं रखा है। राम सिंह बलात्कारी और दुशासन संत हो सकता है। लेकिन मां बाप के मन में नाम रखते कुछ तो भाव आता ही होगा। उस भाव का कुछ असर बच्चे पर भी अपना नाम सुनते आता ही होगा। मासूम बच्चे का नाम रखने में कोई योगदान तो होता नहीं, उसका दोष नाम वाला भी नहीं। उसका दोष तब जब वो अपनी समझ से कुछ करने लायक हो जाता है। तो भाई बच्चे का नाम तैमूर या फ़ौलाद टाइप कुछ रखने वालों का मानस तो गड़बड़ है। वैसे नाम में का रखा है। मेरा नाम हर्षवर्धन है तो क्या मैं सबकी ख़ुशी बढ़ाता ही रहता हूँ। लेकिन फिर भी लोग हर्षवर्धन सुनकर ख़ुश तो हो ही जाते हैं। तो मेरा नाम दोहराइए ख़ुशी बढ़ाइए। और तो नाम में क्या रखा है। मैं बहुत ख़ुश होता हूं, हर बार जब कोई मेरा नाम पूछता है। और वो ख़ुशी माँ बाप के लिए होती है।
-हर्षवर्धन त्रिपाठी

सतर्क सेक्युलर भाई बंधुओं ने तत्परता से मामले को लिया है. इससे पहले कि साम्प्रदायिक ताकते “तैमुर” पर इतिहास “फैलाए” सेक्युलर तैमुर शब्द के सुन्दर-सुन्दर अर्थ नेट छान छान कर दुनिया भर के शब्दकोशों से निकाल कर ला रहे है.
-मेरा डर यह है कहीं “दयालु राजा तैमुर” के नाम का एक अर्थ अपने किसी अवतार के नाम का अर्थ न निकल आए.
-संजय बेंगानी

औरंगजेब नाम का अर्थ सिंहासन को इज्जत बख्शने वाला होता है
पहले से बता दे रहे ताकि आगे किसी धर्मनिरपेक्ष सेलिब्रिटी कपल को अपने बच्चे का नाम औरंगजेब रखना हो तो सफाई देने में दिक्कत ना आए
-अरुणेश दवे 

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